नगर पालिका सभागार में यूपी राबिता कमेटी की ओर से आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते डा. शकील।
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यूपी राबता कमेटी अलीगढ़ और सैयद हामिद फाउंडेशन के तत्वावधान में बुधवार को पालिका कार्यालय के सभागार में ‘तालीमी मुजाकेरा’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें नगर के बच्चों की शिक्षा के मार्ग को सरल बनाने के साथ ही शिक्षण संस्थानों में आधुनिक शिक्षा एवं इसके लिये आवश्यक संसाधन तथा अध्यापकों के आचार, विचार पर प्रकाश डाला गया।
इडॉ. शकील आजमी ने कहा कि 1992 में सैयद हामिद की मऊ आमद के बाद से यहां शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी और शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। नगर में अनेकों छोटी बड़ी सामाजिक संस्थाओं जैसे मऊ वेल्फेयर कमेटी, स्टूडेंटस फोरम, उर्दू पढ़ाओ तहरीक, स्कालर फाउण्डेशन, पालकी सोशल ग्रुप द्वारा नगरवासियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने से लोगों में अपने बच्चे को शिक्षित बनाने में काफी मदद मिली है। तालीमी कारवां के सदस्य सईद अहमद ने कहा कि व्यक्तित्व को संवारने के लिए शिक्षा के साथ शिष्टाचार जरूरी है। दोनों में से किसी एक के अभाव में व्यक्ति मानवीय कद्रों का पालन नहीं कर सकता। शिक्षा इंसानों को जीने का ढंग सिखाती है।
मौलाना ताहिर मदनी ने कहा कि हमारा पैगाम है कि शिक्षा ग्रहण कर मुल्क और पूरी इंसानियत के लिए काम करें। पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने कहा कि शिक्षा प्राप्ति के मार्ग में रूकावटों को दूर करने से बच्चों में शिक्षा का स्तर बढ़ सकता है। मौलाना अबरार अहमद इस्लाही ने कहा कि पाठयक्रम तीन बिंदुओं पर आधारित होता है। इसमें पहला बिंदु पढ़ने वाले, दूसरा पढ़ाने वाले और तीसरा संसाधन की उपलब्धता है। पालिकाध्यक्ष मुहम्मद तय्यब पालकी ने कहा कि यहां 75 प्रतिशत मजदूर तबका है जो अपने बच्चों को मजदूर बनाने के लिए ही सोचता है। जब तक इनका विकास नहीं होगा समाज का भी विकास नहीं हो सकता।
इस अवसर पर जावेद, चंदन, ओजैर गिरहस्त, अब्दुस्सुबहान अलीग, इशरत कमाल, सरफराज अहमद, अमीर हमजा आजमी, नसीम अख्तर आदि शामिल रहे। संचालन डॉ. इम्तेयाज नदीमत ने किया।