मृतक के भाई ने बताया कि टीबी रोग से ग्रसित भाई रूना राजभर की हालत गंभीर होने पर वह उसे लेकर जिला अस्पताल आया था। अस्पताल आने के बाद कई जगह चक्कर लगवाया गया, लेकिन इलाज समय पर नहीं मिल सका। इससे उसकी मौत हो गई।
मऊ जिले के जिला अस्पताल में मंगलवार को गंभीर टीबी मरीज गाजीपुर जनपद के सुरवरपाली गांव निवासी रूना राजभर (35) का समय से उपचार नहीं मिलने पर चार घंटे तक तड़प कर मौत हो गई। मृतक के भाई ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर उपचार नहीं करने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की। भाई ने बताया कि टीबी रोग से ग्रसित होने के बाद भाई का बीते छह साल से उपचार चल रहा था।
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मृतक के भाई वीर बहादुर ने बताया कि टीबी रोग से ग्रसित भाई रूना राजभर की हालत गंभीर होने पर वह उसे लेकर जिला अस्पताल आया था। अस्पताल आने के बाद वह पहले इमरजेंसी में गया, जहां चिकित्सक ने ओपीडी में उपचार कराने को कहा। ओपीडी में आने के बाद चिकित्सक उसे कई चेंबरों का चक्कर लगवाया। इस दौरान भाई की हालत और भी गंभीर होती गई।
बताया कि आपातकाल से लेकर ओपीडी का चक्कर वह भाई का अपनी गोंद में लेकर करता रहा। अस्पताल की तरफ से उसे किसी ने स्ट्रेचर नहीं दिया। उपचार के लिए जिस चेंबर में गया किसी चिकित्सक ने भाई को छूना तक नहीं चाहा। दूर से देखकर वहां चले जाओ कहते रहे। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चक्कर लगाते समय ही भाई ने दम तोड़ दिया।
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मृतक भाई के शव को पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए वीर बहादुर अपने भाई के शव को लेकर अपने घर चला गया। लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने कई सवाल भी खड़ा कर दिया। मृतक का भाई हर चेंबर में जाने के दौरान अपने भाई का निक्षय पोषण योजना से संबंधित उपचार वाला पत्र भी दिखाता रहा, लेकिन किसी ने उसका उपचार करना मुनासिब नहीं समझा।
जिला अस्पताल के आपातकाल में भी भर्ती कर उसका उपचार नहीं किया गया। सीएमएस डा. धनंजय कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी है। इमरजेंसी वार्ड में मरीज को भर्ती किया गया था, जहां उसकी मौत हो गई।