मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी ने सामूहिक दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में विवेचना के बाद पुलिस द्वारा भेजे गए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया। मामले में नामजद आरोपियों ज्ञानेश राय और अंजनी राय को तलब करते हुए सम्मन भेजेने का आदेश दिया। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए 4 मार्च की तिथि नियत किया।
सीजेएम ने मामले के विवेचक तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सरायलखंसी रविंद्र नाथ राय द्वारा जानबूझकर अभियुक्तगण को नाजायज लाभ पहुंचाने तथा विचारण से बचाने के उद्देश्य से भेजी गई अंतिम आख्या के मामले में कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजे जाने का आदेश दिया है। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार वादिनी मुकदमा ने कोर्ट में विवेचक द्वारा भेजे गए अंतिम रिपोर्ट पर आपत्ति प्रस्तुत करते हुए उसे निरस्त करने का अनुरोध किया। वादिनी मुकदमा का कथन था कि मामले के विवेचक ने बिल्कुल निराधार गलत तथ्यों के आधार पर विवेचना कर अंतिम रिपोर्ट भेजा है, जबकि धारा 164 और 161 सीआरपीसी के बयान से घटना साबित हो रही है। लेकिन विवेचक ने बयान को नजरअंदाज करते हुए अभियुक्तगण को बचाने का प्रयास किया है। सीजेएम ने अपने आदेश में लिखा है कि प्रभारी निरीक्षक थाना सरायलखंसी रविंद्र नाथ राय ने स्वयं विवेचना ग्रहण कर मात्र अभियुक्तगण के गांव के रहने वाले गवाहान का मजीद बयान अंकित कर अंतिम आख्या प्रेषित की गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक अभियुक्तगण को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से घटना को झूठी होने का निष्कर्ष देते हुए अंतिम आख्या प्रस्तुत किया है।