मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट डॉ. केपी सिंह ने मानहानि के मामले में पुलिस उपाधीक्षक बांदा राजीव प्रताप सिंह को विचारण के लिए कोर्ट में तलब किया है। साथ ही उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने के लिए समन जारी करते हुए हाजिरी के लिए 20 नवंबर की तिथि तय की है। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र का है।
बहरीपुर गांव निवासी अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। इसमें पुलिस उपाधीक्षक राजीव प्रताप सिंह को आरोपी बनाया। परिवादी का कहना है कि वह सिविल कोर्ट मऊ में वकालत करता है। आरोपी पुलिस उपाधीक्षक राजीव प्रताप सिंह ने एक मई 2023 को दिन में 12:30 बजे पुलिस कार्यालय के पास की फर्जी घटना दिखाकर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। इसमें राजीव प्रताप सिंह ने परिवादी को ठेकेदार होना लिखा है। यह भी लिखा कि परिवादी लगातार गलत दबाव बनाकर गलत काम कराना चाहता है। साथ ही समझौता के लिए 5 लाख रुपये की मांग की है। उल्लेख किया कि परिवादी मुख्तार अंसारी का आदमी है, उसके नाम पर गलत काम करता है। आरोप है कि राजीव प्रताप सिंह ने परिवादी संतोष कुमार सिंह की छवि खराब करने के उद्देश्य से 3 मई 23 को उक्त बातें समाचार पत्रों में छपवाईं। जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा गिरी है तथा उसे मानसिक एवं शारीरिक क्षति हुई है। कोर्ट में परिवादी संतोष कुमार सिंह का बयान दर्ज कराया। साथ ही दो गवाह अनूप कुमार सिंह व उपेंद्र सिंह का बयान दर्ज किया गया। सुनवाई के बाद सीजेएम ने पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक राजीव प्रताप सिंह जो वर्तमान में जनपद बांदा में तैनात हैं उन्हें मानहानि के मामले में विचारण के लिए तलब किया।