मऊ। भाजपा को एक साल के भीतर घोसी में दूसरी बार बड़ी हार का सामना करना पड़ा। सितंबर 2023 में हुए सपा विधायक दारासिंह चौहान के इस्तीफे से खाली घोसी के उपचुनाव में सपा गठबंधन ने भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को 45 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। वहीं घोसी चुनाव में सपा गठबंधन ने उपचुनाव के तर्ज पर बड़ी जीत हासिल की है। जहां उपचुनाव में बाहरी बनाम स्थानीय मुद्दा चुनाव परिणाम में मुख्य भूमिका बना। वहीं इस लोकसभा चुनाव में सुभासपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का बयान से उपजी नाराजगी और भाजपा गठबंधन में भीतरघात हार का कारण बना।
बतातें चलें कि एनडीए गठबंधन का असर बुरी तरह से पूर्वांचल की घोसी सीट के अलावा आजमगढ़, लालगंज, गाजीपुर, बलिया पर भी देखने को मिला। इन सीटों पर सपा गठबंधन गढ़ बचाने में कामयाब रही। घोसी में भाजपा का सुभासपा से समझौते का प्रयोग फेल रहा। बताते चलें कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने सुभासपा से समझौता किया था। जहां सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को प्रदेश में कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ उनके बड़े बेटे डॉ. अरविंद राजभर केा घोसी से उम्मीदवार उतार दिया। राजभर के बाद चौहान जाति के बड़े फैक्टर को साधने को लेकर भाजपा गठबंधन जीत पर आश्वस्त नजर आ रही थी, लेकिन उपचुनाव की भांति कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान, मधुबन विधायक रामविलास चौहान का फैक्टर भी चौहान वोटों को पूरी तरह से तब्दील करने में विफल रहा। हालांकि सुभसपा का कोर वोटर राजभर वोट में उनके पाले में रहा, लेकिन भाजपा के चुनाव चिह्न कमल की जगह सुभासपा के छड़ी से चुनाव लड़ने का असर भी चुनाव में देखने को मिला। सूत्रों की मानें तो सवर्ण वोटरों में राजभर के बयान की नाराजगी को दूर करने को लेकर भाजपा ने जी तोड़ प्रयास किया, लेकिन तो नाराजगी दूर नहीं हो सकी। न ही भीतरघात को वह दूर कर सकी। घोसी के पांचों विधानसभा में भाजपा का कोर वोटर ब्राह्मण, क्षत्रिय सहित अन्य मत भी सपा के राजीव राय को गया।