सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी शासन की मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। शिक्षा सत्र बीत गया, नए शिक्षा सत्र का भी एक माह बीतने को है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के प्रति प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। स्थिति यह है कि कुछ विद्यालय जहां एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं तो कहीं आवश्यकता से काफी अधिक शिक्षक तैनात हैं।
मऊ नगर के एक दर्जन उच्च प्राइमरी स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक के विभागीय कार्य या अवकाश लेने की स्थिति में विद्यालय बंद हो जा रहा है। अभिभावक भी बच्चों का नामांकन कराने से कतरा रहे हैं।
जबकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या ज्यादा है, लेकिन बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र ही दिखी। बुनियादी सुविधाओं को बहाल तक नहीं किया जा सका है। ग्रामीण क्षेत्रों से नगर में शिक्षकों के ट्रांसफर करने में तकनीकी पेंच से मामला लटका पड़ा है। हालत यह है कि कई विद्यालय बंद होने के कगार पर हैं।
विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति होने पर अधिकारी भीषण गर्मी और लू बताकर मामला टाल रहे हैं।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। नए शिक्षा सत्र में भी परिषदीय विद्यालयों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं की जा सकी है। मऊ नगर के एकल शिक्षक के भरोसे चलने वाले उच्च प्राइमरी पर नजर डाला जाए तो उच्च प्राथमिक विद्यालय रस्तीपुर, भटकुंआपट्टी, भदेसरा, रामपुर चकिया, जमालपुरा, परदहां, बकवल, बेलचौरा सहित एक दर्जन परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। कई विद्यालयों में 100 से अधिक बच्चे हैं।
लेकिन एक शिक्षक की तैनाती होने से अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। आरटीई के तहत उच्च प्राइमरी में 35 बच्चों पर एक शिक्षक सहित सभी विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य की गई है। यही हाल रहा तो कई विद्यालयों के बंद होने पर खतरा मंडराने लगा है। इसके विपरीत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या ज्यादा है, लेकिन बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र ही रह रही है।