पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में भेजा था। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी राणा प्रताप सिंह और धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कुल 8 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण अंगद मौर्य, हरिचरन उर्फ हरिश्चंद, घूरा उर्फ प्रेमचंद मौर्य, सतीश मौर्य, सुभाष मौर्य और ब्रषकेतु उर्फ विषकेत मौर्य को बलवा, मारपीट और गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।