मऊ। भारत और चीन के बीच छिड़े सीमा विवाद का असर अब बाजारों पर दिखने लगा है, इस दौरान ग्राहक तो छोड़िए दुकानदार ही चीन के सामानों को रखने और बेचने से तौबा किए। बोले देश के दुश्मन के सामान को बेचने से देश द्रोही से कम नहीं होगा। लेकिन बाजारों में मौजूद चीन निर्मित मोबाइलों की सेल भी दोनों देशों के बीच दरार पड़ने पर प्रभावित हुई है।
बात करने पर घोसी बाजार में इलेक्ट्रानिक्स के दुुकानदार अब्दुल्लाह इस्लाही ने कहाकि वो चीन निर्मित कोई भी सामान रखना छोड़ दिए। बोले चीन का सामान ग्राहक नहीं पसंद करते, बल्कि सस्ता इलेक्ट्रिनिक्स सामान होता है, ऐसे में ग्राहकों को आकर्षित करने और ज्यादा बिक्री करने के लिए हम दुकानदार ही चीन के सामनों को रखते है। लेकिन जब जो अपने देश का नहीं तो उसका सामान बेचने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
इसी क्रम में घोसी बस स्टैंड पर इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान करने वाले पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि देश से बड़ा कुछ नहीं, ऐसे में वो चीन निर्मित सामान जो दुकान में रखे थे, उसे बेचबाचकर सामाप्त कर दिए। चीन निर्मित कोई नया सामान नहीं मंगा रहें। ना ही आगे चीन के सामान दुकान में रखने का उनका कोई इरादा है।
मधुबन निवासी और र्स्वण कारोबारी प्रशांत जायसवाल ने कहाकि उनका ट्रेड चीन निर्मित सामानों को बेचने वाला तो नहीं है, लेकिन वो जनता को इसके लिए जागरुक करने का कार्य जरूर कर रहें हैं। बोले चीन का सामान खरीदने वाले भी जानते है कि यह समान बहुत दिनों तक नहीं चलेगा। खैर इसी बहाने यदि लोग चीन के सामानों से दुरी बना लें तो देश के निर्मित सामानों की डिमांड बढेगी, साथ ही साथ बेरोजगारी भी दूर होगी। बर्तन कारोबार करने वाले प्रह्लाद ठठेरा ने बताया कि मेटल में तो चीन के बर्तनों का कोई लेना देना नहीं है। लेकिन चीनी बर्तनों ककी डिमांड रहती है, लेकिन उसे भी बेचने से उन्होंने तौबा कर लिया है। बोले न अभी बेचा न आगे बेचूंगा चीन निर्मित बर्तन चाहें ग्राहकों की डिमांड होगी तब भी।