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दो दिन में ही बना दीं सात सड़कें

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वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन आनन-फानन में कलेक्ट्रेट परिसर में बनी सड़क। - फोटो : mau
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लोक निर्माण विभाग की कई सड़कों को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के आखिरी दो दिनों में बना दिया गया। ये सड़कें दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों की नहीं जबकि जिला मुख्यालय के इर्द गिर्द की सड़कें हैं। ये सड़कें कई सालों से टूट फूट गई थीं। विभाग की नजर इन पर नहीं जा रही थी। लेकिन वित्तीय वर्ष के आखिरी दो दिनों में ही सात सड़कों को दुरुस्त कर दिया गया। इन सड़कों पर बचे पुराने पिच को भी मानक से नहीं उखाड़ा गया और पिच की परत ऊपर से बना दी गई।
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कलेक्ट्रेट के पूरबी तरफ दीवानी रोड से एसपी आफिस तक जाने वाली सड़क काफी दिनों से टूट फूट गई थी। साथ ही कलेक्ट्रेट और विकास भवन केे जोड़ने वाली, हाइवे से दीवानी कचहरी होते हुए तहसील, एआरटीओ आफिस तक की सड़क बदहाल हो गई थी। इसी प्रकार सदर तहसील से जलनिगम होते हुए स्पिनिंग मिल रोड को जोड़ने वाली सड़क जीर्णशीर्ण हालत में सालों से थी। शहर के डीसीएसके कालेज से बरपुर जाने वाली रोड भी सालों से जीर्ण शीर्ण हालत में थी।

इस सभी सड़कों को 30 से लेकर 31 मार्च की रात तक बना दिया गया। मानक के अनुसार इन टूटी सड़कों के ऊपरी भाग के पिच को पूरी तरह से उखाड़कर नई पिच से लेपन करना चाहिए। लेकिन इन सड़कों को ऐसा नहीं किया गया। पिच की एक मोटी परत दबा दी गई। विकास भवन के आसपास सहित कई सड़क को बीते वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन बना दिया गया। विभागीय अधिकारियों के कारनामों को देखकर लोगों को हैरत हुई। शनिवार को जब लोग कलेक्ट्रेट, विकास भवन, कृषि भवन और तहसील सदर अथवा अन्य सरकारी कार्यालयों पर आए थे, तो उन्हें पुरानी सड़कें दिखी थी। लेकिन जब सोमवार अथवा मंगलवार को आए तो उन्हें ये सड़कें बनाई गई दिखीं।
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किसान नेता देव प्रकाश राय, अधिवक्ता शिवनारायण राय, लेखराज और कैलाश न कहा कि वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में सड़कें आनन फानन बनाने का क्या औचित्य है। इन्हें समय से  मानक के अनुरूप बनाना चाहिए था।
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