मऊ। जनवरी से अब तक लगाए गए रोजगार मेले में मऊ डिपो में सात चालक मिले। परिवहन निगम की तमाम कोशिशों के बावजूद मऊ और दोहरीघाट डिपो में अब भी 84 चालकों की कमी है। जिससे रोजाना 20 बसों के खड़े रहने से एक जनपद से परिवहन निगम को दो लाख रुपये का नुकसान होता है। इसी समस्या को देखते हुए परिवहन निगम ने आगामी 15 जुलाई को दूसरी बार बड़े स्तर पर चालक भर्ती कैंप लगाया जाएगा। मऊ डिपो में 74 और दोहरीघाट में 60 बसें हैं। इनमें 12 अनुबंधित हैं, जिनके लिए परिवहन निगम को चालक नहीं देना होता है।
मऊ डिपो की 63 बसों को चलाने के लिए 85 और दोहरीघाट में 59 बसों के लिए चालक हैं। अब भी मऊ डिपो में 30 और दोहरीघाट में 54 चालकों की कमी है। चालकों की कमी से दोनों डिपो में 10-10 बसें रोजाना खड़ी रहती हैं। रोजाना एक बस एक दिन में न्यूनतम 10 हजार रुपये की कमाई करती है। इस तरह 20 बसों के नहीं चलने से दो लाख रुपये और 30 दिन में 60 लाख रुपये का नुकसान तो हो रहा है, समय से बसें नहीं मिलने से यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।
चालकों की भर्ती के लिए लगातार रोजगार मेला लगाया जा रहा है। दो मई से 16 मई तक जिले में पांच भर्ती कैंप लगाए गए हैं। वहीं जनवरी से अब तक लगाए गए रोजगार मेले में 30 चालकों का चयन करके ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेजा गया था। लेकिन आधे लोग वहां पहुंचे ही नहीं, जो पहुंचे उनमें से केवल सात लोग पास हुए। 15 जुलाई को आजमगढ़ में लगने वाले रोजगार मेला में आजमगढ़, शाहगंज, डॉ. अंबेडकर, मऊ, दोहरीघाट, बलिया और बेल्थरारोड डिपो के लिए 400 चालकों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन निगम की जारी सूचना के अनुसार 8वीं पास और दो साल पुराना हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के साथ कोई भी आवेदन कर सकता है। आवेदक की उम्र 23 साल छह माह होनी चाहिए।
रोजाना 7.50 लाख रुपये है मऊ डिपो की कमाई
मऊ डिपो की 10 बसों के खड़ा रहने के बाद 12 अनुबंधित और 53 निगम की बसें वर्तमान में रोजाना 7.50 लाख रुपये की कमाई करती हैं। त्योहार और सहालग के सीजन में ये आंकड़ा 8.50 लाख रुपये पहुंच जाता है। खड़ी रहने वाली 10 बसों का संचालन नियमित हो तो ये कमाई 9.50 लाख रुपये हो जाएगी।
चालकों की संख्या बढ़ने पर ग्रामीण रूटों पर चलेंगी बसें
वर्तमान में जिला मुख्यालय से सीमावर्ती गांवों तक ग्रामीण सड़कों पर प्राइवेट बसों की भरमार है। लेकिन उन रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलती हैं। 10 साल पहले मऊ से बोझी, मऊ से मधुबन, मऊ से बढुआगोदाम होते हुए चिरैयाकोट सहित कई ग्रामीण रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन होता था। लेकिन यात्रियों की संख्या कम दिखाकर बंद कर दी गईं हैं। परिवहन निगम के अधिकारियों का दावा है कि चालकों की संख्या बढ़ने पर ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन शुरू कराया जाएगा।
चालकों की भर्ती के लिए अप्रैल से मई तक चार बार भर्ती कैंप लगाए गए थे। आवेदन आने के बाद अभ्यर्थियों को कानपुर भेजा गया है। एक समय में सभी चालकों से काम नहीं कराया जा सकता है। कुछ छुट्टी पर होते हैं। वहीं ड्यूटी पूरी करने पर चालकों को आराम करना होता है। पर्याप्त चालक नहीं होने से कुछ बसें खड़ी रहती हैं। - हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ