फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mau News: दूसरी रैक समाप्त, फिर भी किसानों तक नहीं पहुंची खाद, आस बरकरार

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। किसानों को कम दर पर डीएपी मुहैया कराने के लिए पिछले सप्ताह पहले डीएपी की एक रैक जिले में आई है। बावजूद सहकारी साधन समितियों पर किसानों को यह आसानी से नहीं मिल रही है। जहां मिल रही है तो सरकारी कीमत से ज्यादा देना पड़ रहा है।
विज्ञापन

किसानों के खाद लेने की इस पीड़ा को जानने के बाद अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जनपद के अनेक साधन सहकारी समिति पर पड़ताल की तो वहां की स्थिति विभाग के दावे के विपरीत थी। रबी की फसल की बोआई के लिए जनपद में किसानों के लिए करीब पांच हजार एमटी डीएपी पहुंच सकी है। जबकि अक्तूबर और नवंबर में 7125 एमटी का लक्ष्य निर्धारित है। करीब 25 लाख आबादी वाले जिले में तीन लाख किसान हैं। ये किसान करीब एक लाख 21 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती करते हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की माने तो इस वर्ष करीब 95 हजार हेक्टेयर जमीन पर किसान रबी की फसल की बुआई का कार्य करेंगे।
कोपागंज ब्लॉक के भावरकोल साधन सहकारी समिति पर सुबह 11 बजे ताला बंद था। आसपास के लोगों ने बताया कि बीते तीन दिन से समिति पर ताला बंद है। कुछ लोगों ने बताया कि किसान आने के बाद यहां से निराश होकर चले जाते हैं।
विज्ञापन

मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के धर्मसीपुर साधन सहकारी समिति और धान क्रय केंद्र पर सुबह करीब 11 बजे दो ट्रैक्टर खड़े थे। एक ट्रैक्टर पर बोरी लदी थी, जबकि दूसरे ट्रैक्टर से धान उतारकर बोरे में भरा जा रहा था। समिति के भवन में एक बोर्ड पर रेट सूची लिखी थी। जिस पर यूरिया 266.50 रुपया और डीएपी का रेट 1350 रुपया लिखा था। समिति कायार्लय के अंदर एक कुर्सी पर सहायक आंकिक व सचिव राजकुमार यादव बैठे थे। सचिव जयप्रकाश यादव नदारद थे। किसान बनकर टीम के सदस्यों ने डीएपी का उपलब्धता क बारे में जानकारी ली तो बताया गया कि पिछले सप्ताह डीएपी की 250 बोरी आई थी। तीन दिन खाद का वितरण किया गया। इस केंद्र से कुल नौ गांव जुड़े हैं। इसमें धर्मसीपुर, चकदेवा, करथौली, सोनिसा, मखुनी, रामपुर बखरिया, एकडंगा, महासो, भवरेपुर आदि गांव के कुल करीब 1150 सदस्य हैं। अभी केंद्र पर करीब 566 बोरी यूरिया है।

25 दिन से समिति पर डीएपी नहीं
रानीपुर। ब्लॉक क्षेत्र के कई साधन सहकारी समितियों पर डीएपी न होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के खुरहट साधन सहकारी समिति, कमालसेनपुर साधन सहकारी समिति पर 25 दिन से डीएपी खत्म है। डीएपी ना मिलने से खुरहट, कसारी, अमारी, अमरहट, बड़ागांव, बड़ार, सुल्तानपुर, सेमरी, सिगाडी, बसारतपुर, सेमरी पहाड़पुर के गावों के किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गेहूं की बोआई के लिए समिति पर डीएपी उपलब्ध ना होने के कारण किसानों को निजी दुकानों से डीएपी खरीदनी पड़ रही है। दुकानदार किसानों से अधिक दाम ले रहे है। क्षेत्र के अजय यादव, रामप्रकाश यादव, नवीन उपाध्याय, जीतेन्द्र, नीरज आदि किसानों ने बताया कि समिति पर डीएपी ना होने की समस्या आ रही है। लोगों ने जल्द से जल्द विभागीय उच्चाधिकारियों से समितियोें पर डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। इस बाबत समिति के सचिव सतेन्द्र श्रीवास्तव का कहना जिले पर डिमांड लगी हुई है।

किसान बोले - मूल्य से अधिक लिए गए रुपये
बढ़ुआ गोदाम। बढुआ गोदाम सहकारी समिति से नौ गांव के करीब 16 सौ किसान जुड़े हैं। इस बार रबी सीजन में अब तक दो बार में समिति पर 520 बोरी डीएपी आ पाई है। क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया कि समिति से खुलेआम 1350 रुपये मूल्य की डीएपी को 1380 रुपये और 1400 रुपये में किसानों को बिक्री की गई।

समितियों पर ताला बंद, किसान परेशान
कुसुम्हा। दोहरीघाट क्षेत्र के साधन सहकारी समिति गोंठा व धनौली लोहड़ा समिति जो सियाराही गांव में स्थापित है। इन दोनों समितियां पर डीएपी का कहीं आता-पता नहीं है। 10 दिन पहले गोंठा साधन सहकारी समिति पर डीएपी बंटी थी। समितियों पर ताला बंद होने से किसान दोगुने दाम पर लेने को मजबूर हैं। दोहरीघाट, गोंठा, कोरौली, पाउस, नई बाजार इत्यादि जगहों पर खुलेआम दुकानदार 1500 से लेकर 1700 रुपये बोरी बेच रहे हैं। क्षेत्र के किसान अरविंद राय, श्रीप्रकाश राय, रामअवतार, राजेश सिंह, बृजभूषण सिंह ने बताया कि समितियां पर अगर समय से डीएपी डीएपी उपलब्ध रा कर खाद का वितरण कराया जाता तो किसानों को यह 300 से 400 रुपये बोरी अधिक दाम देकर खाद लेनी नहीं पड़ती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें