मऊ। दीपावली के समय शासन के निर्देश पर दो दिन के लिए बर्न यूनिट खोली गई। एक माह से बंद पड़ी यूनिट की सफाई कर चमकाया गया। लेकिन दीपावली बीतने के बाद से एक बार फिर से यूनिट पर ताला बंद हो गया है। सदर अस्पताल में छह बेड का बर्न यूनिट की कोई भी इसकी सुध लेने वाला नहीं है। बेड सहित सभी उपकरण जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़े हुए है।
बर्न यूनिट पर एक बार फिर से ताला बंद होने से ऐसे मरीज आने वालों को अभी भी सिर्फ रेफर कर दिया जाता है। तीन वर्ष पहले जिला अस्पताल के बर्न यूनिट को कोरोना संक्रमण काल के दौरान कोविड के मरीजों के उपचार के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया था। फिर संक्रमण की दर कम होने के बाद भवन को कोविड टीकाकरण केंद्र बनाया गया। जो आज भी अन्य टीकाकरण केंद्र के रूप में ही चल रहा है। उस समय से लेकर अभी तक बर्न यूनिट आपात काल के दूसरे तल पर एक कक्ष में लगे दस बेड से संचालित हो रहा है। वर्तमान में वहां पर भी ताला बंद है।
तीन करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
मऊ। जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में करीब तीन करोड़ की लागत से 25 बेड के बने बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। लेकिन पिछले सात वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टॉफ की तैनाती न होने के कारण इस यूनिट का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। इस यूनिट को शुरू करने के लिए एक प्लास्टिक सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, छह स्टाफ नर्स, तीन ड्रेसर, छह मल्टी टास्क वर्कर, की आवश्यकता होती है। कोविड काल में आजमगढ़ से डा. सुभाष सिंह काे संबंद्ध किया गया था। कोरोना काल के दौरान उनके आजमगढ़ जाने के बाद बर्न यूनिट बिना प्लास्टिक सर्जन के ही चल रही है। कुल पदों में अभी मात्र तीन ड्रेसर और छह मल्टी टास्क वर्कर की ही तैनाती है।
बर्न यूनिट इमरजेंसी के दूसरे तल से संचालित हो रही है। वार्ड में दस बेड संरक्षित है, मानव संसाधन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। - डा. एपी गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल