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मऊ में सरयू उफान पर: गुमटी- दीवार पर बोर्ड लगाकर बना दीं बाढ़ चौकियां, फोटो खींचकर चले जा रहे जिम्मेदार

Tue, 25 Aug 2026 12:33 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।

सार

मऊ जिले में सरयू का जलस्तर खतरा बिंदु से ऊपर है। वहीं जिले के मधुबन तहसील में गुमटी और दीवार पर बोर्ड लगाकर बाढ़ चौकियां बना दीं गईं। अपलोड करने के लिए जिम्मेदार इसी का फोटो खींचकर चले जा रहे हैं। 
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मऊ में नई बस्ती दुबारी में बनी बाढ़ चौकी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मऊ जिले में सरयू नदी का जलस्तर लगातार खतरे बिंदु से ऊपर है। इसके बाद भी सतर्कता नहीं दिख रही है। सोमवार को हमारी टीम ने मधुबन तहसील में बने बाढ़ चौकियों की पड़ताल की। मौके पर बाढ़ चौकियों पोस्टर लगा दिया लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं मिला।वहीं गुमटी और दीवार पर चौकी का बोर्ड लगा दिया गया है, लेकिन जिम्मेदार कहां बैठेंगे, यह तय नहीं है।

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मधुबन तहसील में छह बाढ़ चौकिया बनाई गई हैं। इसमें श्रीराम डिग्री कॉलेज तेलिया कला, परासिया जयराम गिरी और दुबारी नई बस्ती के साथ मिश्रौली सूरजपुर और बेलौली सोनबरसा धाम तो किशुनपुर सुग्गी चौरी है। सोमवार को दुबारी नई बस्ती पर हमारी टीम सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर पहुंची तो यहां कोई भी कर्मचारी नहीं मिली। यहां एक घर के बरामदे में बाढ़ चौकी बनी मिली। यहां देवासी, खूबलाल यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शाम को दो पुलिसकर्मी यहां आते हैं और फोटो खींचकर चले जाते हैं। लेखपाल, स्वास्थ्यकर्मी यहां नहीं आते हैं।

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इसी तरह से दोपहर एक बजे परसिया में बनी बाढ़ चौकी पर पहुंची टीम को कोई नहीं मिला। ग्रामीण मनोहर ने बताया कि यहां जब बड़का साहब लोग आवे के होईने तभी यहां सब दिखाई देवे न लोग। वहीं किशुनपुर सुग्गी चौरी बाढ़ चौकी पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। इतना ही नहीं हकीकत में बाढ़ चौकियों में दाना-पानी, दवा, चारा, प्रकाश, बेड की सुविधाएं नहीं हैं। डीएम के आदेश के बाद बाद भी जिम्मेदार सरयू किनारे वाले गांवों में अभी बाढ़ का इंतजार कर रहे हैं।

मऊ में नई बस्ती दुबारी में बनी बाढ़ चौकी। - फोटो : अमर उजाला
अतिसंवेदनशील गांव के चारों तरफ पहुंचा बाढ़ का पानी
सरयू नदी के किनारे मधुबन तहसील के दस से ज्यादा गांव हैं। इनमें से पांच अतिसंवेदनशील हैं। जिसमें बिन्टोलिया, जलरहवा, हाता, दुबारी नई बस्ती, गाजियापुर, परसिया जयरामगिरि सहित दूसरे गांव बाढ़ की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में हैं। यहां नदी का पानी सड़क पर बहता दिखा। यह गांव नदी के पानी से चारों तरफ से घिरा नजर आया। लोग यहां बीच सड़क पर बहते पानी के बीच से गुजरते दिखे।

लोग बोले
 
बड़का साहब के आवे पर आइन न। अभी काहे खातिर आइन लोग, दो जानी शामवा के आवेंना और फोटो खींचकर कर चल जात बाना।
-खूबलाल यादव, धर्मपुर कुड़िया

यह चौकी बना दी गई है लेकिन यहां कोई आता नहीं है। कागजों पर इसे ही चलाया जा रहा है। लोगों के जरूरत का सामान भी नहीं है।
-देवसी यादव कुड़िया लंका टोला
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दुकान पर लगाकर औपचारिकता पूरी
बाढ़ को लेकर कितनी मानीटरिंग की जा रही है। जगह न मिलने पर आसपास की दुकान के ऊपर बाढ़ चौकी का बैनर लगा दिया जा रहा है। इतना ही इस बाढ़ चौकियों पर जिलाधिकारी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों के सीयूजी भले लिखे हैं लेकिन फोन मिलाने पर फोन नहीं उठता है।
 
छह विभागों के कर्मचारियों की होती है तैनाती
बाढ़ चौकियों पर राजस्व विभाग से लेखपाल, स्वास्थ्य विभाग से एक स्वास्थ्यकर्मी, पशुपालन विभाग से एक कर्मचारी, पुलिस विभाग से एक पुलिसकर्मी, सिंचाई विभाग और पंचायती राज विभाग से एक एक कर्मचारी की तैनाती होती है।
 
अधिकारी बोले

बाढ़ को लेकर बाढ़ चौकिया बनाई गई हैं। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों मौके पर रहते हैं सोमवार को लेखपालों की मीटिंग होने के चलते वह नहीं मिले होंगे। अन्य कर्मचारी अनुपस्थित थे यह गंभीर मामला है वो इसकी जानकारी लेंगे। -दीपक सिंह, एसडीएम मधुबन 

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