जिला अस्पताल के वार्ड में बेड पर नहीं रहती है चादर।
जिले में सरकारी अस्पतालों का हाल बदहाल है। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल जैसे तैसे चल रहे हैं। इन दोनों ही अस्पतालों में दवाओं के नाम पर केवल काम चलाऊ ही हैं। भीषण गर्मी का मौसम होने के बावजूद यहां कोई एंटीबायोटिक दवाइयां नदारद हैं।
अस्पतालों मंे चारों तरफ गंदगी का आलम है। इमरजेंसी के ठीक बगल में सीवर का बजबजाता केबिन सालोंसाल ओवरफ्लो होता रहता है। इनडोर में मरीजों के बिस्तरों पर चादर तक नहीं है। खिड़कियों के शीशे फूटे हैं जिससे भयंकर लू के थपेड़े मरीजों की बीमार शरीर को झुलसा रहे हैं।
जिला अस्पताल में इस समय गंभीर बीमारियों में चिकित्सा के लिए कोई अच्छे एंटीबायोटिक नहीं हैं। एक मात्र एंपीसिलीन इंजेक्शन से काम चलाया जा रहा है चाहे मरीज उल्टी दस्त का हो या बुखार अथवा आपरेशन वाला हो। इनडोर में चारों तरफ गंदगी ही दिख रही है।
मरीजों के साथी जहां तहां पान की पीकें फेंकते रहते हैं। मरीजों को काफी दवाइयां बाजार से खरीद कर लानी पड़ रही हैं। अस्पताल में आरओ प्लांट भी है लेकिन मरीजों को आरओ का शुद्ध पेयजल नहीं मिलता क्योंकि यह केवल रात में नौ बजे के बाद चलाया जाता है।
इनडोर वार्डों में अधिकांश पंखे हैं खराब अस्पताल के इनडोर में ऊपरी मंजिल में वार्ड संख्या दो , तीन , नौ और दस के अधिकांश पंखे महीनों से खराब हैं। प्रत्येक वार्ड में चार चार पंखे लगे हैं लेकिन इनमें लगभग सभी में दो से तीन पंखे खराब हैं।
मरीजों की शिकायत थी कि भीषण गर्मी में उनकी कोई सुनता ही नहीं, गर्मी के मारे मरीज से लेकर तीमारदार तक ही हालत खराब रहती है।