मऊ। जिला अस्पताल में गैर संचारी बीमारियों (नॉन कम्यूनिकेबल डिजिज) को लेकर पहुंचने वाले मरीजों का उपचार राम भरोसे ही चल रहा है। ऐसा नहीं है कि इन मरीजों के लिए यहां चिकित्सीय सुविधाएं नहीं है। बल्कि अस्पताल में इस बीमारी के मरीजों के लिए अलग सेल यानी एनसीडी (नॉन कम्यूनिकेबल डिजिज) क्लिनिक संचालित हो रहा है। लेकिन बीते चार वर्षो से इस क्लिनिक के संचालन के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी है। एक बेहद छोटा कमर में क्लिनिक जो कि पूरी तरह से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है वहां से संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं जगह के अभाव में शुगर, हाईपर टेंशन आदि बीमारियों की जांच के लिए आई मशीन भी बीते कई सालों से धूल फांक रहीं हैं। इस क्लिनिक में बीते चार वर्षो से फिजिशियन की तैनाती तक नहीं हो सकी है।
100 बेड के जिला अस्पताल में गैर संचारी बीमारियों की जांच के लिए एनसीडी क्लिनिक जिला अस्पताल के एक बड़े हॉल में खोला गया था। यहां शुरूआत में एपिडेमियोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. आदित्य राय, लैब टेक्नीशियन धर्मेंद्र गिरी, फिजियोथैरेपिस्ट राधेश्याम और एक काउंसलर तथा दो स्टॉफ नर्सों की तैनाती की गई। वर्ष 2017 में दो फिजिशियन डॉ. प्रशांत राय तथा डॉ. शालिनी राय की भी तैनाती हुई। लेकिन एक वर्ष बाद दोनों चिकित्सकों के इस्तीफा देने के बाद एनसीडी को बड़े हाल के बजाए छोटे से कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया।
इधर बीते कई वर्षों से मरम्मत न होने के चलते जिस कमरे में एनसीडी क्लिनिक संचालित हो रही है, वह जगह जगह से जर्जर हो चुका है। आए दिन छत से पलस्टर का मलबा नीचे गिरता रहता है। वही बेहद छोटे कमरे में संचालित होने के चलते बायो कैमेस्ट्री एनेलाइजर, सेल काउंटर, इलेक्ट्रानिक आईवी आदि मशीन बीते चार साल से अधिक समय से डिब्बे में बंद है। जबकि नियमानुसार जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की शुगर, मोटापा, बीपी, हाईपर टेंशन आदि गैर संचारी बीमारियों की जांच एनसीडी क्लिनिक में होनी चाहिए। ऐसे में जब मरीज यहां जांच कराने के लिए पहुंचते तो कर्मचारी उन्हें मशीन इंस्ट्राल न होने की बात कहकर वापस लौटा देते है। इतना ही नहीं तीन वर्ष से अधिक समय से यहां कोई फिजिशियन न होने से भी मरीजों की परेशानी हो रही है।
क्या है एनसीडी क्लिनिक
मऊ। एनसीडी (नॉन कम्यूनिकेबल डिजिज) क्लिनिक में शुगर, रक्तचाप, कैंसर, मानसिक बीमारी, किडनी रोग, आर्थराइटिस आदि दूसरी बीमारी जो कि गैर संचारी बीमारी में आती है। उनका उपचार के लिए शासन ने एनसीडी क्लीनिक का संचालन शुरू किया है। सामान्य ओपीडी की तरह इस क्लिनिक में मरीजों की जांच तथा उपचार किया जाता है।
सीएमएस डॉ. बृज कुमार का कहना था कि जिला अस्पताल के सभी कक्ष जर्जर हाल हो गए हैं। काम किया जा रहा है। एनसीडी दो कमरों में संचालित हो रहा है। यहां 50 वर्ष से ऊपर के मरीजों का इलाज किया जाता है।