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Mau News: सड़कें और सब्जी मंडी बनी छुट्टा पशुओं का ठिकाना, आश्रय स्थलों में हरे चारे को तरसे

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इन दिनों सड़कों और खेतों में घूम रहे छुट्टा पशुओं से लोग परेशान हैं। जगह-जगह 25 से 30 की संख्या में गोवंशों का ठिकाना दिन में खेत और रात में जिले की प्रमुख सड़कें होती हैं। बलिया मोड़ स्थित सब्जी मंडी में 50 की संख्या में मवेशी टहलते रहते हैं। इसी तरह जिले में 53 पशु आश्रय स्थल बने हैं। इनमें पांच हजार गोवंश मौजूद हैं। लेकिन अनदेखी के कारण इनका हाल भी बेहाल है। हरे चारे का प्रबंध नहीं होने से सूखा भूसा खाकर गोवंश हांफ रहे हैं। आए दिन पशु कमजोर होने के साथ ही बीमार हो रहे हैं। केयर टेकर पशुओं को हैंडपंप से पानी पिलाते हैं, लेकिन पशुओं की संख्या अधिक और स्टाफ कम होने की वजह से प्यास नहीं बुझ पा रही है।
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दोहरीघाट ब्लॉक क्षेत्र के पाउस पशुआश्रय स्थल में गोवंश सूखा भूसा खाने को मजबूर हैं। जबकि शासन की ओर से गोवंशों को हरा चारा खिलाने के निर्देश हैं। लेकिन यहां नाद में सूखा भूसा ही खाने के लिए डाला जा रहा है। चिरैयाकोट संवाददाता के अनुसार, चिरैयाकोट नगर के रसूलपुर वार्ड स्थित सामुदायिक मिलन केंद्र में अस्थायी पशु आश्रय स्थल, भोगवा जलालपुर अलिनगर पशु आश्रय स्थल, खीलवा जसड़ा और कमरवां पशु आश्रय स्थल में भी क्षमता से काफी कम गोवंश संरक्षित हैं। वहीं मोहम्मदाबाद गोहना पशु आश्रय स्थल में क्षमता 200 है लेकिन वहां केवल 100 गोवंश हैं। वहीं वलीदपुर स्थित अस्थायी पशु आश्रय स्थल में क्षमता के अनुसार 23 गोवंश संरक्षित हैं।
मधुबन संवाददाता के अनुसार मधुबन नगर पंचायत के पशु आश्रय स्थल में 20 पशुओं को संरक्षित किया गया है। जहां चारा, पानी की समुचित व्यवस्था के बाद भी टिन शेड में पशुओं को राहत नहीं मिल रही है। वहीं फतहपुर मंडाव ब्लॉक क्षेत्र के केशवपुर सुल्तानीपुर और कुतुबपुर धनेवा में भी स्थिति ठीक नहीं दिखी।
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इस संबंध में प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने प्रभार संभाला है। इस संबंध में बहुत जानकारी नहीं है, इस विषय में पशुपालन विभाग के अधिकारी जानकारी दे पाएंगे।
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