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जोर शोर से चल रहा चीनी मिल हाउस में मशीनों का नवीनीकरण

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मऊ/घोसी। बीते वर्ष वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारियों के हंगामा करने से नाराज तत्कालीन जिलाधिकारी ने गन्ना को पेराई के लिए सठियांव चीनी मिल को हस्तांतरित कर दिया था। अभी भी मिल के कर्मचारियों और अधिकारियों का कई माह का वेतन बकाया है। इसके बाद भी इस पेराई सत्र में मिल को पुन: चलाने की कवायद की जा रही है। मिल के जीएम लालता प्रसाद सोनकर की माने तो इस बार 23 लाख कुंतल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है।
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बीते वर्ष हुई गन्ना खरीद में किसानों का करीब 12 करोड़ रुपया बाकी है। फिर भी नए तरीके से इस बार मिल को शुरु करने की कवायद की जा रही। चीनी मिल के जीएम की मानें तो इस बार किसानों को सहुलियत दी जाएगी, ऐसे में किसानों को उनके मोबाइल फोन पर मिल की तरफ से एसएमएस भेजा जाएगा। इस पर वो अपना गन्ना लाएंगे। इस प्रक्रिया से किसानों को ज्यादा समय तक मिल पर रुकना नहीं पड़ेगा।
किसान सहकारी चीनी मिल घोसी, वर्तमान समय में करीब सात सौ करोड़ के घाटे में चल रही है। मिल की स्थापना 1982 में हुई थी। डबल प्लांट होने के बाद भी क्षमता के अनुसार कम गन्ना मिलने तथा गलत प्रबंधन के चलते यह घाटे में चलती चली गई। वर्तमान समय में गत पेराई सत्र का किसानों का गन्ना मूल्य का मात्र 12करोड़ रुपये बकाया है। चीनी मिल क्षेत्र में 26 हजार गन्ना किसान है। 9300 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुआई हुई है। चीनी मिल द्वारा वर्ष 2013-14 में 24.68लाख कुंतल, 20114-15 में 25.05 लाख कुंतल,2015-16 में 20.87लाख कुंतल, 2016-17में 16.45 लाख कुंतल, 2017-18में 18.96लाख कुंतल, 2018-19 में 23.04 लाख कुंतल तथा 2019-20में 21.62 लाख कुंतल पेरा गया था।
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इस संबंध में जीएम लालता प्रसाद सोनकर ने बताया कि इस वर्ष चीनी द्वारा 23 लाख कुंतल गन्ना पेरने का लक्ष्य रखा गया है। जिसको किसानों, कर्मचारियों की सहायता से प्राप्त किया जाएगा। चीनी मिल के कर्मचारियों का सात माह का तथा अधिकारियों का 13 माह का वेतन बकाया है। अस्सी फीसदी किसानों को गन्ना का भुगतान करने के बाद भी अभी करीब 12 करोड़ भुगतान बकाया है। बीते सत्र में 68 करोड़ 24 लाख रुपया देनदारी थी।
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