लाख कवायद के बाद भी बिजली बिल वसूली में जिला अब भी पिछड़ा साबित हो रहा है। पिछले एक साल से बकाया वसूली के लिए अफसर डोर-टू-डोर चक्कर लगा रहे हैं। बावजूद टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा। हालत यह है कि 60 फीसदी ही उपभोक्ता बिल जमा कर रहे। बाकी मुफ्त की बिजली जला रहे। उधर, जिले के सरकारी विभागों पर भी करोड़ों रूपये का बकाया है। लेकिन विभाग उन्हें भी नहीं वसूल पा रहा।
बिजली विभाग में जिले में 2.79 लाख बिजली उपभोक्ता पंजीकृत हैं। लेकिन इसमें 60 फीसदी ही उपभोक्ताओं द्वारा हर माह बिल का भुगतान किया जा रहा हैै। विद्युत वितरण खंड प्रथम के बिजली बिल के राजस्व का आधार बनाए जाए तो लगभग सात करोड़ के प्रति माह सापेक्ष केवल 5 करोड़ ही जमा हो पा रहा। शेष बकाया लगातार चल रहा। यही हॉल अन्य दो खंडों का भी है।
मऊ नगर के अधिशासी अभियंता सुबोध कुमार ने बताया कि नगर में पंजीकृत 36 हजार उपभोक्ताओं में 60 फीसदी उपभोक्ता ही पांच करोड़ रूपये राशि जमा करते हैं। वहीं बिलों का भुगतान न करने वाले में आम उपभोक्ताओं के साथ बुनकर भी शामिल है। इससे जहां विभाग को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है वहीं इसकी वजह से बिजली लगातर नहीं मिल पाती और लोगों को भीषण कटौती झेलनी पड़ती है।
जिले के कई सरकारी विभागों पर करोड़ों का बकाया चल रहा है। पुलिस विभाग पर एक करोड़ 35 लाख बकाया चल रहा है। जिसमें पुलिस विभाग ने 32 लाख जमा कराया है। वहीं कलेक्ट्रेट पर 35 लाख बकाया चल रहा है। जिसमें कलेक्ट्रेट ने 35 लाख जमा कराया है। जिला अस्पताल तथा राजकीय महिला अस्पताल पर तीन करोड़ का बकाया चल रहा है। शिक्षा विभाग पर दो करोड़ 48 लाख रुपया बकाया चल रहा है। नगरपालिका जलकल पर तीन करोड़ 77 लाख, स्ट्रीट लाइट पर तीन करोड़ 21 लाख बकाया चल रहा है। इसी तरह अन्य सरकारी विभागों पर करोड़ों का बकाया चल रहा है।