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Mau News: जर्जर मिल की तरह हादसे का कारण बन सकते हैं रतनपुरा के कंडम भवन

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रतनपुरा। जिले के रतनपुरा ब्लाॅक में तीन ऐसे कंडम भवन हैं जो कभी भी जानलेवा हादसे का सबब बन सकते हैं। इसमें एक में सप्ताह में दो दिन टीकाकरण भी किया जा रहा है, जबकि दूसरे में क्रय केंद्र बनाया गया है। बीते कई सालों से इन कंडम भवनों की न तो मरम्मत कराई गई है न ही इन्हें खाली कराने को लेकर कोई कवायद की गई है।
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जबकि दूसरी तरफ रविवार को ब्लाॅक क्षेत्र के ही बिलौझा में पुरानी बंद मिल का हिस्सा गिरने से दो किशोरों की मौत के बाद प्रशासन अब कंडम और जर्जर भवनों को चिह्नित करने का दावा कर रहा है। बदहाल भवन की बात करें तो रतनपुरा ब्लाॅक में इसकी संख्या दस से ज्यादा हैं, लेकिन इसमें सबसे बदतर हालात रतनपुरा ब्लाॅक कार्यालय के पास बने सहकारी संघ बीज भंडार भवन की है। यह भवन 1952 में बनने के बाद अब तक सिर्फ एक बार 2018 में केवल रंगरोगन कर इसे दुररुत करने की कोशिश की गई थी। इसी बदहाल भवन से खाद बीज का वितरण किसानों को किया जाता है।
ब्लाॅक परिसर में ही बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन जो कि 1953 में बना है, यह जर्जर होने के बाद ध्वस्त नहीं किया गया है। सकारात्मक बात है कि इसमें अस्पताल संचालित नहीं है, लेकिन इसके बगल में बने एक कक्ष से सप्ताह में दो दिन टीकाकरण किया जाता है। इसी तरह से एएनएम सेंटर भी बेहद बदहाल है। चौकाने वाली बात है कि इन दोनों कंडम भवनों के पास आम, जामून के पेड़ होने के चलते यहा अक्सर बच्चे एकत्रित होते है। बीते रविवार को बिलौझा गांव में बंद मिल परिसर मेंं आम तोड़ने के लिए घुसे दो किशोरों की मौत कंडम भवन के गिरने से हुई थी। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा पूरी जर्जर भवन को ढहाने की कार्रवाई की गई थी।
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