मऊ। कोरोना महामारी के दौरान महानगरों अथवा अन्य प्रदेशों से जिले में आने वाले प्रवासियों के रोजगार में बरसात ने बाधा डाल दिया है। जिले के आधे से अधिक गांवों में बरसात के चलते इन दिनों में मिट्टी के काम बंद हो गए हैं। इससे आधे से अधिक प्रवासियों का रोजगार बंद हो गया है। इसके चलते प्रवासियों के परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट की नौबत आ गई है। शासन ने प्रवासियों सहित मनरेगा मजदूरों के रोजगार को प्राथमिकता देने के निर्देश के साथ ही बजट भी जारी कर दिया है। 22 मई से जनपद में मनरेगा के तहत जनपद के 684 गांवों में मजदूरों को काम दिए जा रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी केेहरी सिंह के अनुसार जिले में 31मई तक ट्रेन और बसों से 57 हजार प्रवासी आ चुके थे। इनमें वह संख्या शामिल नहीं है जो ट्रकों, साइकिलों, टेंपो ,बाइक और अपने अन्य साधनों से अपने घरों को पहुंचे और होम क्वारंटीन हुए। एक अनुमान के अनुसार ऐसे प्रवासियों की संख्या लगभग 22 हजार से अधिक है। लेकिन इनका आंकड़ा सरकारी दस्तावेजों में हीं िशिमल किया गया है।
अनलॉक के बाद आने वाले श्रमिकों की डाटा अभी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। इधर जिले में एक सप्ताह सेलगातार हो रही बरसात से गांवों में चकमार्गों अथवा पोखरा खुदाई तथा नहरों की सफाई या खेतों के समतली करण का काम बंद हो गया। है। प्रवासी मजदूरों की जो संख्या है उनमें बच्चों और महिलाओं की संख्या शामिल है। बरसात होने से पहले तक इस प्रकार जिले में लगभग15 हजार प्रवासियों को रोजगार मिल रहा था। लेकिन इसके बाद वर्षा ने प्रवासी श्रमिकों के रोजगार पर ताला लगा दिया।
चूंकि पक्के काम के लिए राजगीर मिस्त्री होने चाहिए। प्रवासी श्रमिकों में से बहुत से ऐसे हैं जो कुशल नहीं हैं। इनके अलावा बहुत से ऐसे भी श्रमिक हैं जो कुशल तो हैं लेकिन गांवों में उनके लिए रोजगार नहीं है । गांवों में जो रोजगार मनरेगा के तहत मिल सकता है। उनमें वे काम नहीं कर सकते है। मसलन फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग गांवों में फावड़ा नहीं चला सकते और जो काम वे महानगरों में करते रहे हैं वे काम गांवों में उपलब्ध नहीं है। ऐसे लोगों के समक्ष इन दिनों भारी समस्या आ गई है।
ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि गांवों में बजट भी है लेकिन बरसात की वजह से कच्चे काम बंद कराने पड़े हैं। चूंकि गांवों में कच्चे कामों पर 60 प्रतिशत धन व्यय करने का नियम है। पक्केकाम कम हैं और उसमें केवल प्रशिक्षित राजगीर ही काम कर सकते हैं।
इस मामले में सीडीओ राम सिंह वर्मा ने बताया कि प्रवासियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने के निर्देश दिए गए हैं। लगभग 15 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया जा रहा है।