घाघरा की कटान के आगे बाढ़ खंड की सारी परियोजना बेकार साबित हुईं। इसमें विभाग की लापरवाही ज्यादा रही है। इस वर्ष कटान पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने 22 करोड़ की लागत से रामपुर धनौली और मुक्तिधाम के बीच 960 मीटर लंबी पिचिंग कार्य कराने की योजना तैयार की। लेकिन समय सीमा के अंदर काम पूरा न होने के कारण किसानों की करीब दस एकड़ जमीन घाघरा मे समा गई। कटान के चलते दोहरीघाट बाजार में स्थित रोडवेज और मुक्तिधाम का अस्तितत्व खतरे में है।
बताते चले वर्ष 1990 से घाघरा की कटान की जद मे दोहरीघाट कस्बा आ चुका है। इस बात की जानकारी होने पर बाजारवासी काफी भयभीत है, तब से अब तक बाजार की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें घाघरा में समा भी चुकी हैं। अब तक की कटन में ऐतिहासिक धरोहरों पर अब भी कटान का संकट मंडरा रहा है। इस समय नागा बाबा की कुटी, गौरीशंकर घाट स्थित प्राचीन शिव मंदिर, जानकी मंदिर शिववालय, धर्मशाला, खडे़सी महराज का मंदिर, डोम राज का मकान, खाकी बाबा की कुटी तथा जानकी घाट का अस्तित्व समाप्त हो चुका है।
बची खुची नगर की ऐतिहासिक धरोहरों में मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मन्दिर अब खतरे में है, कटान के चलते सैकड़ों एकड़ भूमि घाघरा में विलीन हो चुकी है कटान रोकने के नाम पर विभाग अरबों रूपये पानी में बहा चुका है। लेकिन उसका कोई सार्थक प्रयास नहीं निकला। लेकिन कटान जस की तस है। विभागीय अधिकारी हर वर्ष कटान रोकने के लिए कोई न कोई योजना तैयार करते है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका।
मुक्तिधाम सेवा संस्थान के प्रबंध गुलाबचंद गुप्त, व्यापार मण्डल अध्यक्ष विनय जायसवाल, नगर भाजपा अध्यक्ष रविन्द्र वर्मा, भाजयूमो जिला उपाध्याक्ष्या पंकज मद्वेशिया ने हनुमान मन्दिर से लेकर मुक्तिधाम तक पिचिंग कराने की मांग की है। इस संबंध में अधिशासी अभियन्ता अशोक कुमार का कहना है कि नगर की बची हुयी सभी धरोहरों की रक्षा की जाएगी।