जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना औंधे मुंह गिरी है। प्रशासन की लापरवाही से जागरूकता अभियान महज कागजों तक ही सीमित रहा। नतीजा यह रहा कि ढाई लाख में से महज 11060 किसानों को ही योजना का लाभ मिल सका। जिले में 90 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है। जनपद में धान की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। बाढ़ तथा सूखा के कहर ने किसानों की कमर तोड़कर रख दिया है। केंद्र सरकार की ओर से कम प्रीमीयम पर किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी। खरीफ फसल के लिए 31 अगस्त तक किसानों को नजदीकी बैंक में फसल बीमा कराया जाना था।
निर्धारित समय सीमा के अंदर कृषि विभाग तथा शासन प्रशासन की ओर से जागरुकता कार्यक्रम कागज पर चलने से भारी संख्या में किसान महात्वकांक्षी योजना से वंचित हो गए।
हालत यह है कि खरीफ फसल में मात्र 11060 किसानों ने ही प्रीमीयम जमा किया है। किसानों की मानें तो बैंकों में फसल बीमा कराने के लिए संबंधित कागजात जमा कराने के बाद भी बैंक अधिकारियों ने केवल लोन लेने वाले किसानों का ही फसल बीमा कराने में रुचि लिया। गैर ऋणी किसानों को बीमा कंपनी जाने की सलाह देते रहे। किसान रतनपुरा क्षेत्र के ग्राम प्रधान संगठन के मंडलीय महामंत्री रामाश्रय मौर्य, किसान संजय सिंह, महेंद्र सिंह, भगवान गुप्ता का कहना है कि प्रशासन तथा बैंकिंग उदासीनता के चलते किसान योजना से वंचित हो गए हैं। इसके लिए बैंक और कृषि विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं।
इस बाबत उप निदेशक कृषि आशुतोष मिश्र का कहना है कि किसानों में जागरुकता के अभाव तथा बारिश होने से किसानों ने रुचि नहीं लिया। फसल बीमा के संबंध में किसान शिकायत कृषि विभाग में दर्ज करा सकते हैं।