सूर्य उपासना का पर्व रविवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। महिलाओं ने पर्व के मद्देनजर जमकर खरीदारी भी की। बाजारों में देर शाम तक गहमागहमी रही। पोखरों, तालाबों, नदी तटों पर सामूहिक रूप से सफाई करने में लोग लग गए हैं।
नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में डाला छठ की तैयारी तेज हो गई है। नगर के गाजीपुर तिराहा, सहादतपुरा सहित विभिन्न बाजारों में जगह-जगह फलों व पूजा के सामानों के स्टाल लग जाने से देर शाम तक गहमागहमी रही।
स्टालों पर भक्तिगीतों के बजने से माहौल भक्तिमय हो गया है। कई धार्मिक पोखरों, तालाबों पर सामूहिक रुप से सफाई करने में लोग लगे रहे। बताया जाता है कि सबसे पहले यह व्रत जगत जननी माता सीता ने भगवान भाष्कर से पुत्र रत्न की कामना किया था और राज्य के जनता की सुख समृद्घि के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया था।
एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बना था। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।
कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रोपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं। इन्हीं मान्यताओं के तहत पुत्रों की मंगलकामना का पर्व डाला छठ पर्व मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।
पुत्रवती महिलाएं तो भगवान भाष्कर को अर्घ्य देंगी ही ऐसी महिलाएं जिनकी कोख सूनी है उनके द्वारा भी कोख को हरी करने के लिए भगवान सूर्य का विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया जाएगा।