भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में बीज निदेशालय कुशमौर में शुक्रवार से अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना की तीन दिवसीय 30वीं वार्षिक बैठक का शुभारंभ हुआ।
इसमें किसानों को समय से बीज उपलब्धत कराने के लिए पीपीपी माडल अपनाने पर जोर दिया गया। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों के सहयोग से निर्यात योग्य गुणवत्तायुक्त बीज के उत्पादन की अपेक्षा की गई।
इस अवसर उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। बैठक में देश के जानेमाने कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए कई वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डा.एस अय्यप्पन सचिव डेर व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने किया। बैठक को संबोधित करते हुए उन्हाेंने अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना-राष्ट्रीय बीज परियोजना को रेखांकित किया।
उन्हाेंने इस बात पर बल दिया कि बीज अनुसंधान निदेशालय, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से सार्क, ब्रिक, बिम्सटेक, असियान व अफ्रिकी देशों के लिए निर्यात योग्य गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन करें।
उन्होंने बदलते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रति सहिष्णु बीज उत्पादन की नई तकनीकी विकसित करने पर बल दिया। कहा कि बेरोजगार नौजवान, महिला किसान, कृषि स्नातक
बीज उत्पादन कर अपना भविष्य संवार सकते हैं। किसानों को उचित दर पर व उचित मात्रा में बीज की उपलब्धता के लिए पीपीपी माडल को आवश्यक बताया। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो के निदेशक डा.एके शर्मा ने पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जई के गुणवत्तायुक्त बीज पर प्रकाश डाला।
निदेशक भारतीय सब्जी अनुसंधान डा.बी सिंह ने सब्जियों के बीज उत्पादन पर प्रकाश डाला। डा.एनपी सिंह निदेशक भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर, डा.एसके राव अधिष्ठाता, जवाहर लाल नेहरू कृषि विवि जबलपुर ने सूक्ष्म जीवों द्वारा बीजों की गुणवत्ता बढ़ाने पर बल दिया। बैठक में बीज तकनीकी अनुसंधान क्षेत्र में सुदीर्ध
सहयोग एवं योगदान को मान्यता देने के लिए अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना-राष्ट्रीय बीज परियोजना फसल से जुड़े हुए डा. एसएस अटवाल विभागाध्यक्ष भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय
केंद्र करनाल, डा.एके वासु विधानचंद्र कृषि विवि पश्चिम बंगाल, डा.बीबी पात्रा उड़ीसा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि भुवनेश्वर, डा. जेएस बरार निदेशक पंजाब कृषि विश्वविद्यालय जुधियान को सम्मानित किया गया।
जबकि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र करनाल को सर्वश्रेष्ठ प्रजनक बीज उत्पादन केंद्र व एमपी केवी राहुरी महाराष्ट्र को सर्वश्रेष्ठ बीज तकनीकी शोध केंद्र के रूप में पुरस्कृत किया गया।