कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो सपा के लोग सड़कों पर उतर कर घेराव और आंदोलन करने की चेतावनी दी। जिसकी ज़िम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। सपाजनों ने राजनीतिक दबाव में मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाया है।
सपा जिलाध्यक्ष का आरोप है कि विभागीय नोटिस के जवाब की कॉपी निकाल कर पुलिस ने राजनीतिक दबाव में सांसद राजीव राय के ऊपर ही केस दर्ज कर दिया है। मांग की कि गैरकानूनी एफआईआर को तत्काल खारिज किया जाए।
सीएमएस के नोटिस का संज्ञान लेकर जनहित में डॉक्टर के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। अस्पताल में निरीक्षण के दौरान ड्यूटी से नदारद डाक्टर और उपस्थिति दलालों के खिलाफ मुकदमा और कठोर विभागीय कार्यवाही की जाए।
सभी सरकारी डॉक्टर जो प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो। मरीजों से अवैध तरीके से वसूली बंद हो। जो डॉक्टर लगातार बाहर से और खास दुकानों से दवा और जांच कराने के लिए मरीजों को मजबूर करते हैं उनपर भी कार्रवाई हो।
मामले पर गौर करें तो जिला अस्पताल में 17 अक्तूबर को घोसी लोकसभा सीट से सांसद राजीव राय की डॉ. सौरभ त्रिपाठी से हुई नोकझोंक हो गई थी। इस मामले में सीएमएस से चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
लेकिन शुक्रवार को चिकित्सक ने सांसद के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर में जिक्र है कि सांसद के साथ आए 10-15 समर्थकों ने भी डॉक्टर से अभद्रता की।
सांसद राजीव राय के अनुसार उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण मरीजों की शिकायत पर किया था। सांसद राजीव राय के अस्पताल के निरीक्षण का दो वीडियो वायरल हुए थे। पहला वीडियो चिकित्सक सौरभ त्रिपाठी से नोकझाेंक का वीडियो था।
दूसरे दिन सांसद राजीव राय एक दूसरा वीडियो अस्पताल में फर्श पर लेटे मरीज से बात करने का भी वायरल हुआ था।