मऊ। सूबे के वन मंत्री दारा सिंह चौहान के जिले में हरियाली की हकीकत अभियान चलाकर सिर्फ कागजों में देखने को मिल रही। वन विभाग के बाद जिले के नौ नगर पंचायतों की पड़ताल करने पर सामने आया एकाध नगर पंचायत छोड़ दिया जाए तो सभी ने बीते वर्ष जुलाई माह में पौधरोपण तो किया, लेकिन पौधों के देख रेख के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं किया। इसका परिणाम है कि पौधे या तो सूख गए या फिर पशुओं का निवाला बन गए। मेहनत न करनी पड़े इसके लिए अधिकांश नगर पंचायतों ने पौधरोपण के लिए क्षेत्र के कब्रिस्तान का चुनाव किया था।
बीते वर्ष शासन से मऊ जिले में पौधरोपण के लिए 23 लाख तीन हजार सात सौ 72 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें पांच लाख 28 हजार 375 पौधरोपण करने का लक्ष्य वन विभाग के जिम्मे था। जबकि नगर निकायों के साथ अन्य विभागों को 17 लाख 75 हजार 417 पौधरोपण करने का लक्ष्य नियत किया गया था। इसमें निकायों का लक्ष्य 15 हजार 7 सौ 37 पौधरोपण का निर्धारित किया गया था। सभी नगर पंचायतों को वन विभाग ने नि:शुल्क पौधे भी उपलब्ध कराया था। लेकिन निकायों ने उसकी ऐसी तैसी कर दिया।
वलीदपुर संवाददाता के अनुसार नगर पंचायत में बीते वर्ष 1180 पौधे लगाए गए थे। लेकिन देखरेख और रखरखाव के अभाव में चार फीसदी भी पौधे नहीं बचे है। नगर पंचायत की तरफ से कब्रिस्तान पर पौधो को लगाया गया था, लेकिन कोई सुधि न लेने के चलते जानवर और बकरियां 96 प्रतिशत पौधों को चबा गई। ईओ नितेश गौरव ने बताया की पिछले वर्ष 1180 पौधरापण हुआ था, जिसे जानवर खा गए, रख रखाव पर कोई धनराशि खर्च नहीं हुई थी।
नव सृजित मधुबन नगर पंचायत में वर्ष 2019 में 15 अगस्त तक दो चरणों में 744 पौधों को लगाया गया। लेकिन वही पौधे मौजूद है जो चाहरदीवारी के अंदर लगे थे। रोडवेज परिसर, जलकल, बीआरसी और कुछ प्राथमिक विद्यालय पर लगभग 10 फीसदी पेड़ बचे हैं। छपरा पोखरे पर चेयरमैन माधुरी मद्धेशिया के नेतृत्व में महिला सभासदों ने अशोक, पीपल, आवांला,नीम, सागौन के 151 पौधे लगाए गए थे।
इओ मुकेश चौधरी के नेतृत्व में बीआरसी व इंग्लिश मीडियम जूनियर हाई स्कूल में 100 सागौन, 5 आम्रपाली व एक हरिशंकरी का पौधा लगाया गया था। लेकिन ज्यादा बरसात होने से सागौन के पौधे सड़ गए। वहीं अधिकांश पौधों को ब्रिकगार्ड और कवर जाली न होने के कारण पशु खा गए। इस तरह से नगर क्षेत्र में महज 10 फीसदी पेड़ बचे हैं । रोपित पौधों को नर्सरी से सतर हजार रुपये में खरीदा गया था। नगर पंचायत घोसी में बीते वर्ष में कुल 21सौ पौधे नगर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए थे। अधिकांश पौधरोपण कब्रिस्तानों में किए गए थे। लेकिन सुरक्षा और देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे सुख गए या फिर जानवरों का निवाला बन गए।
ईओ विनीत की मानें तो पौधरोपण में करीब 20 रुपये का खर्च आया था। नगर पंचायत कोपागंज में बीते वर्ष 2019 में 2500 पौधरोपण किया गया। अधिकांश पौधे मंदिर, कब्रिस्तान और सड़कों के किनारे लगाए गए । मंदिरों में लगाए गए पौधे तो देखरेख होने के कारण बचे हैं, लेकिन सड़क के किनारे लगाए गए पौधों में से 90 प्रतिशत को जानवर खा गए, या फिर देख भाल के अभाव में सुख गए।
नव सृजित नगर पंचायत चिरैयाकोट में बीते वर्ष 1100 पौधरोपण किए गए थे। पौधरोपण के लिए मंदिर, कब्रिस्तान, को चुना गया। रख रखाव के अभाव में कुछ पौधे सुखे तो अधिकांश को छुट्टा पशुओं ने अपना चारा बना लिया। फिर भी दस फीसदी पौधे अभी है। इस वर्ष पुन: 1176 पौधे लगाए गये है। दोहरीघाट नगर पंचायत में बीते वर्ष 500 पौधे लगाए गए थे। रामघाट, जानकी घाट, दुर्गा जी मंदिर तथा सरकारी शीतगृह के सामने लगाए गए पौधे देख भाल के अभाव में नष्ट हो गए हैं। सरकारी शीतगृह के सामने पौधों की जगह घास दिखाई पड़ रही।
ईओ ऋचा सिंह ने बताया कि 500 पौधों का लक्ष्य था, जिसे वन विभाग ने निशुल्क उपलब्ध कराया था। लेकिन रखरखाव के अभाव सुख गए या फिर जानवर खा गए। अमिला नगर पंचायत में एकाध पौधो को छोड़ दिया जाए तो सभी पौधे सुरक्षित है। यहां सौ पौधे लगाए गए थे। सभी चाहरदीवारी के अंदर होने के कारण बचे है। नगर पंचायत अदरी में बीते वर्ष 12 सौ पौधरोपण किया गया था। पौधों के रखरखाव में 70 हजार रुपये खर्च कर ट्रीगार्ड बनवाए गए। इसके चलते 40 फीसदी पौधे बचे है।
इस मामले में जिले के डीएफओ संजय विश्वाल ने बताया कि बीते वर्ष हुए पौधरोपण का व्यौरा मांगने के लिए नगर पंचायत सहित अन्य सभी विभागों को चार पत्र भेजे गए, लेकिन किसी ने कोई जबाब नहीं दिया। ऐसे में बाद में चुप्पी साध ली गई। वहीं इस मालले में प्रदेश के वनमंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि हम अमर उजाला की तरफ से पौधरोपण के गोलमाल के लिए चलाए गए मुहिम का हम स्वागत करते है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेकर इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसे बख्सा नहीं जाएगा।