मौसम में बदलाव होते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। सबसे ज्यादा भीड़ बच्चों के डॉक्टर, आंख, नाक, कान और गला के चिकित्सकों के यहां लग रही है। इन दो विभाग में ही सौ से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। पिछले दो तीन दिन से मौसम में विशेष परिवर्तन देखने को मिल रहा है। दिन में धूप और बारिश के बाद शाम ढलते ही माैसम में हल्की ठंड का एहसास हो रहा है, वहीं दिनचर्या में परिवर्तन का लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में मौसम में बदलाव के बाद से अभी रोजाना 700 मरीज अस्पताल आ रहे है। अस्पताल में उल्टी, दस्त, डायरिया, उक्त रक्तचाप, बुखार, जुकाम, वायरल के साथ एलर्जी के ज्यादा मरीज है। यह बीमारी लोगों के दूषित पानी के सेवन से हो रही है। डायरिया और बुखार की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे है। इसके लिए अस्पताल की तरफ से पीआईसीयू वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ आंख, कान, नाक व गला के मरीज हैं।
आंख, कान और नाक व गला में होने वाले इंफेक्शन
जिला अस्पताल के ईएनटी डॉ. सौरभ त्रिपाठी बताते हैं कि बारिश शुरू होते ही नाक, कान और गले की समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए सावधानियां जरूरी हैं। कान का बहना एक आम समस्या है, जो बारिश के मौसम में ज्यादा परेशान करती हैं। कान में पानी जाने से समस्या बढ़ जाती है। इसलिए जिनके कान में मवाद आता है, वे विशेष ध्यान रखें कि कान में पानी न जाएं, क्योंकि पानी जाने से संक्रमण बढ़ता है और कान ज्यादा बहने से पर्दे का छेद बड़ा हो जाने से सुनाई देना बंद हो जाता है। इसलिए पानी से बचना बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ इंफेक्शन से मुंह का पकना और गले को भी प्रभावित करता है। इसलिए बिना लापरवाही के चिकित्सक के सलाह पर ही दवा लें।