समाजवादी पार्टी कार्यालय पर सोमवार को परशुराम जयंती मनाई गई। इस दौरान उनके चित्र पर मालाफूल अर्पित कर नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि परशुराम एक युग पुरुष थे, त्याग और तमस्या के प्रतिमूर्ति थे। सत्य के लिए हमेशा संघर्ष किया। इसके लिए उन्हें नरसंहार तक करना पड़ा।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शिवप्रताप यादव ने कहा कि परशुराम एक योगी पुरुष थे।उनका वर्णन रामायण से लेकर महाभारत तक में मिलता है। उन्होंने सत्य के प्रति हमेशा आवाज उठाई और इसे कायम रखने के लिए हथियार उठाया।
कहा कि वह नरसंहार से भी नहीं चूके। जिला उपाध्यक्ष संजय पाण्डेय ने कहा कि परशुराम जयंती को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर सरकार ने उनके प्रति मान बढ़ाया है।
परशुराम का जीवन काला बड़ा ही संघर्षशील एवं क्रांतिकारी रहा है। उन्होंने कभी मान सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया और एक योद्धा की तरह हमेशा लड़ते रहे।
कहा महाभारत में कर्ण ने झूठ बोलकर उनसे शिक्षा ली लेकिन आखिरी वक्त में जब उन्हें आभास हुआ कि कर्ण क्षत्रिय होते हुए ब्राह्मण बनकर शिक्षा ले रहा है
तो उन्होंने उन्हें श्राप दे दिया कि तुम्हारी विद्या ठीक वक्त पर काम नहीं आएगी। समाजवादी पार्टी के सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र दुबे ने कहा कि परशुराम का वर्णन रामायणकाल में भी मिलता है।
जब सीता स्वयंवर में शिव धनुष भगवान रामचंद्र जी तोड़ते हैं, तो उसकी टंकार सुनकर परशुराम क्रोधित होकर आए। इस बीच लक्ष्मण से उनका संवाद भी हुआ लेकिन बाद में उन्हें भगवान श्रीरामचंद्र के अवतार का आभास हुआ और
वापस चले गए। कहा कि आज हमें परशुराम के संघर्षों से सीख लेनी चाहिए ताकि जीवन संघर्ष में आगे बढ़ सकें। इस अवसर पर मुख्य रूप से रामधनी चौहान, अशोक यादव, योगेंद्र यादव योगी, बृजेंद्र यादव, नन्हकू राजभर, मोहन यादव, बलिराम , आफताब आदि उपस्थित रह्रे।