रोडवेज बसों में लगे पैनिक बटन कुछ महीने में ही टूटने लगे हैं। कई बसों में वायरिंग कर लगाए गए बटन के तार भी टूट गए हैं। तो कहीं बटन ही टूटे हैं। दो साल में महाकुंभ में इमरजेंसी में सिर्फ दो लोगों ने पैनिक बटन दबाकर मदद मांगी थी। रोडवेज यात्रियों को बटन दबाकर इमरजेंसी मदद की सुविधा दी गई थी। करीब दो साल पहले ही मऊ और दोहरीघाट डिपो की बसों में वीएलटी डिवाइस (ह्वीकल लोकेशन ट्रैकिंग) इंस्टाल किया गया था। बस स्टैंड पर कंट्रोल रूम बनाया जाना था लेकिन अब तक ये सुविधाएं बहाल नहीं हो पाई है।
साल 2012 में निर्भया कांड के बाद बनाए गए निर्भया फंड की मदद से परिवहन निगम बसों में सुरक्षा बढ़ाने की योजना तैयार की गई। इसके तहत सभी बसों में वीएलटी डिवाइस इंस्टॉल किया गया। मऊ और दोहरीघाट डिपो में दिसंबर 2023 में वर्ष 2015 के बाद शामिल बीएस-3 कैटेगरी की 43 बसों में ये डिवाइस इंस्टॉल की गई थी। यह सुविधा बीएस-4 और बीएस-6 बसों में पहले से ही लगा होता है।
इसके तहत वायरिंग करके बस की सभी सीटों के पीछे पैनिक बटन लगाए गए, जिसे दबाने पर यात्री को कुछ ही समय में सहायता मिलने का दावा किया गया। लेकिन देखभाल और मरम्मत नहीं होने से कुछ बसों में पैनिक बटन काम नहीं कर रहे हैं। मऊ डिपो के बेड़े में 71 बसें हैं, इनमें 59 निगम की और 11 अनुबंधित हैं।
वहीं दोहरीघाट डिपो में 54 बसें हैं, इनमें दो बसें अनुबंधित हैं। सभी बसों में लगे वीएलटी को लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। पैनिक बटन दबाते ही कंट्रोल रूम और डायल 112 को सूचना मिलेगी। फिर कुछ ही मिनट में स्थानीय तौर पर यात्री को मदद पहुंचाई जाएगी।
इससे बस चालकों द्वारा लंबी दूरी की बसों को बेवजह जगह-जगह रोककर ले जाने जैसी शिकायतों से निजात मिली है। इसके साथ ही अब यात्री सही समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
कहासुनी होने पर मांगी थी मदद
महाकुंभ के दौरान पैनिक बटन दबाकर दो यात्रियों ने मदद मांगी थी। बस के कंडक्टर और यात्रियों के एक समूह के बीच कहासुनी बढ़ता देख एक यात्री ने मदद मांगी थी। दूसरे यात्री ने भी बस स्टाफ क् द्वारा यात्रियों से अभद्रता करने की शिकायत की थी। स्थानीय स्तर के साथ ही मऊ डिपो के एआएम के पास भी सूचना पहुंची थी।
मऊ डिपो की सभी बसों में वीएलटी डिवाइस इंस्टॉल है। सभी को लखनऊ मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया गया है। सफर के समय किसी तरह की परेशानी होने पर यात्री पैनिक बटन दबाकर मदद मांगते हैं। एक्सप्रेसवे या हाईवे पर दुर्घटना होने पर भी चालक परिचालक बटन दबाकर मदद मांग सकते हैं। सफर के दौरान तार टूट जाते हैं। यदि पैनिक बटन का तार टूटा होगा तो मैकेनिक से मरम्मत करा दी जाएगी। - हरिशंकर पांडेय - एआरएम, मऊ