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Mau News: सूचना लीक होने पर जांच से ही पहले बंद हो गए 100 से ज्यादा अस्पताल

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गर्भपात कराने वाले पांच अस्पतालों पर अमर उजाला स्टिंग के बाद भले ही 72 घंटे के अंदर स्वास्थ्य विभाग ने स्टिंग में कवर हुए अस्पताल सहित सात अस्पताल सील किए हैं, लेकिन सूचना लीक होने से नौ ब्लॉकों में ऐसे 100 से अधिक अस्पताल अपने बोर्ड हटाकर गायब हो गए हैं।
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इनमें ऐसे कई अस्पताल हैं जिनका आयुर्वेद विधा में पंजीयन है, लेकिन वे एलोपैथ विधा में प्रैक्टिस कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर आयुष विभाग के साथ मिलकर अभियान चलाने की योजना तैयार की है।
सीएमओ डॉ. पंकज राय ने बताया कि जिले में हाल में चले अभियान के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें अस्पताल संचालक आयुर्वेद विधा में पंजीकरण कराकर एलोपैथ में उपचार करा रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के मानकों के हिसाब से आयुर्वेद के डॉक्टर एलोपैथ में कुछ दवाइयां तो लिख सकते हैं, लेकिन ऑपरेशन की मनाही होती है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर अब स्वास्थ्य विभाग जल्द ही आयुष विभाग के साथ मिलकर जिले के नौ ब्लॉकों में संयुक्त अभियान चलाएगा।
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान थानीदास स्थित अस्पताल सेवा सदन के मेडिकल स्टोर में आयुर्वेद विधा की दवाइयों का स्टॉक रखा हुआ मिला था। उधर, इस अभियान के बाद कोपागंज और बड़राव ब्लॉक में 50 से अधिक छोटे क्लीनिक से होर्डिंग हटाए जा चुके हैं, तो कई अपने अस्पताल बंद कर फरार हो गए हैं।
वहीं, यही स्थिति घोसी और दोहरीघाट ब्लॉक में देखने को मिल रही है। अभियान से बचने के लिए यहां भी कई अस्पताल बंद हैं। सीएमओ डॉक्टर पंकज राय ने बताया कि शुक्रवार को अवकाश के चलते टीम ने कोई अभियान नहीं चलाया, लेकिन जल्द ही दोबारा अभियान चलाया जाएगा।
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नियमों को ताक पर रखकर संचालित मिले अस्पताल
केस एक
सितंबर 2020 में कोपागंज के दोस्तपुरा मोहल्ले में संचालित अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत और प्रसूता की बच्चेदानी निकालने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी की। जहां अस्पताल का पंजीकरण आयुर्वेद का मिला था, लेकिन अस्पताल में एलोपैथ विधा से ऑपरेशन किया जा रहा था। मामले में पीड़िता के ससुर की तहरीर पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज किया गया।
केस दो
29 सितंबर 2024 को नगर के भीटी में संचालित प्रिंस अस्पताल की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की गई। इसके बाद एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की। पता चला कि अस्पताल आयुर्वेद में पंजीकृत है। इसके बाद आयुष विभाग के अधिकारी पहुंचे तो पंजीकरण की जांच की गई। पता चला कि पंजीयन एक्सपायर है। जांच में यह भी सामने आया कि यहां भर्ती मरीजों का ऑपरेशन भी किया जाता है। इसके बाद अस्पताल को तत्कालीन क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सतेंद्र साहू ने सील कर दिया था।
आंकड़ों पर एक नजर
सीएमओ कार्यालय के आंकड़ों के हिसाब से जिले में एलोपैथ पद्धति से उपचार के लिए 100 बेड के 20, 50 बेड के 34, मेडिकल क्लीनिक के तौर पर 29, जबकि 11 नर्सिंग होम, 13 पैथोलॉजी और 71 अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र पंजीकृत हैं। वहीं, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय के मुताबिक आयुर्वेदिक पद्धति से 220 और यूनानी पद्धति से उपचार के लिए 250 नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। जबकि दो साल पहले तक आयुर्वेद विधा से पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या 178 थी, तो यूनानी पद्धति से उपचार करने वाले डॉक्टरों की संख्या 140 थी।
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