फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘हमारी लड़ाई का मतलब सरकार का विरोध नहीं’

Mon, 04 May 2015 11:10 PM IST
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
अपने अधिकारों के लिए हम सरकार से लड़ाई जारी रखेंगे लेकिन इसे किसी सरकार केविरोध की दृष्टि से न देखा जाए। अधिकार के लिए मुखर होना संवैधानिक अधिकार है। हम इस दायरे में ही अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे। 
विज्ञापन



ये बातें पूर्व सांसद और जमीयते उलेमा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहीं। वे रविवार को देर रात कस्बे के पहाड़पुरा ईदगाह में जमीयते उलेमा की स्थानीय इकाई द्वारा आयोजित हौसूले इंसाफ कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।


मौलाना मदनी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हमारे पुरखों ने भी कुर्बानियां दी हैं। यह मुल्क जितना औरों को प्यारा है, उससे कहीं ज्यादा हमें भी प्यारा है। लेकिन आज तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों में समाज के निर्दोष लोगों को पकड़ा और मारा जा रहा है।
विज्ञापन



ऐसे घिनौने कृत्य करने वाले अल्पसंख्यक समाज ही नहीं बल्कि देश के भी दुश्मन हैं। हमारी लड़ाई समाज के बेगुनाहों पर ढाए जा रहे जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ है। इसके रुकने तक हम खामोश नहीं बैठेंगे। मौलाना मदनी ने कहा कि हम आजाद भारत को बंटने नहीं देना चाहते थे। हमारा संगठन बंटवारे के पूरी तरह खिलाफ था।


राज्यसभा सांसद सालिम अंसारी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी आवाज बुलंद करने का अधिकार सबको है। इसे कोई नहीं रोक सकता। नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष अरशद जमाल ने कहा कि राजनैतिक दल अल्पसंख्यकों को अपना वोट बैंक समझना बंद करें। सरकार किसी की भी हो हुक्मरान कोई भी हो, यदि हम सताए गए तो इसके खिलाफ हमारी आवाज को कोई भी नहीं दबा सकता।


बुनकर नेता अबूबकर अंसारी, ईसाई समुदाय के प्रमुख, आरके मसीह, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति ने भी अल्प संख्यकों के प्रति सरकारों के नजरिए को एक छलावा बताया।
विज्ञापन



कांफ्रेंस में जनपद के अलावा देवरिया, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर सहित कई जिलों से लोग भारी तादाद में पहुंचे थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें