प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय निरंजन चंद्र पांडेय ने भरण-पोषण के मामले में न्यायालय से जारी रिकवरी वारंट का तामील न कराए जाने को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर रिकवरी वारंट का तामील कराने का निर्देश दिया।
साथ ही संबंधित थानाध्यक्ष/प्रभारी निरीक्षक घोसी का वेतन न्यायालय के अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश दिया। मामले में सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि नियत की गई।
मामले के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में इजरा वाद संख्या 273/20, अफसाना खातून बनाम मुहम्मद अयूब विचाराधीन है। इसमें मुहम्मद अयूब पुत्र मौलाना मुहम्मद महबूब अहमद निवासी जमालपुर विक्कमपुर, कोतवाली घोसी के विरुद्ध रिकवरी वारंट जारी किया गया है। इसमें कुल 38,500 रुपये की वसूली के लिए वारंट भेजा गया था।
पुलिस अधीक्षक को भेजे गए पत्र में प्रधान न्यायाधीश ने उल्लेख किया है कि न्यायालय में लंबित इजरा वाद में 3 अप्रैल 2026 को प्रासेस सहित एक पत्र प्रेषित किया गया था, लेकिन खेद का विषय है कि इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया गया।
संबंधित थाने द्वारा कई बार न्यायालय से जारी प्रासेस तामील/अदम तामील कर वापस प्रेषित नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा जारी आदेशिकाएं न्यायालय की संपत्ति होती हैं और किसी को भी अपने स्तर से इन्हें रोकने अथवा रखने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा जताई कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाने के जरिए प्रत्येक दशा में रिकवरी वारंट का तामील कराना सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही संबंधित थानाध्यक्ष का वेतन न्यायालय के अग्रिम आदेश तक तत्काल रोकने का निर्देश दिया गया। मामले में सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि नियत की गई।