मऊ। युवाओें के लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसरों के निर्माण के लिए शुरू की गई कौशल विकास योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं किया जा सका है। पिछले तीन वर्ष में प्रशिक्षण हासिल करने वाले 22 प्रतिशत युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ा जा सका है।
प्रशिक्षण हासिल करने वाले 4575 के सापेक्ष 984 युवाओं को ही रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ा जा सका है। मार्च से कोरोना संक्रमण के चलते प्रशिक्षण तथा रोजगार मेले का आयोजन न होने के चलते युवा रोजगार की तलाश में हैं।
सरकार की तरफ से युवाओं को उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से कौशल विकास योजना शुरू की गई। कौशल विकास योजना का मुख्य लक्ष्य युवाओं के लिए ज्यादा अवसरों का निर्माण करना है ताकि वे इन अवसरों का इस्तेमाल करके अपना पसंदीदा क्षेत्र चुन सकें। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। अलग-अलग कोर्स का प्रशिक्षण तीन, छह, नौ या फिर एक वर्ष तक चलता है। जिले में 12 क्षेत्रों से ज्यादा पाठ्यक्रमों को प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।
आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2017-18 में जिले को 1800 प्रशिक्षार्थियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य दिया गया। जिसके सापेक्ष 2052 लाभार्थियों को आईसीटी, इलेक्ट्रिकल, सिक्योरिटी, गारमेंट मेकिंग सहित विभिन्न सेक्टरों में 2052 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। रोजगार मेलों के माध्यम से 227 लाभार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया। इसी क्रम में 2018-19 में जिले को 2149 प्रशिक्षार्थियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य दिया गया। रोजगार मेलों के माध्यम से 767 लाभार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया। जबकि 2019-20 में 135 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर रोजगार मेले का आयोजन न होने से युवा रोजगार की तलाश में हैं। इस बाबत नोडल अधिकारी तथा आईटीआई के प्रधानाचार्य भूपेंद्र पाल का कहना है कि लाभार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रयास जारी है।
कौशल विकास योजना से मिला युवाओं को रोजगार
मऊ। कौशल विकास योजना के तहत युवा प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार कर अपना घर गृहस्थी चला रहे हैं।इस संबंध में रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के कमरवां निवासी तेज बहादुर राजभर का कहना है कि कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास केंद्र काझा कोठी से प्रशिक्षण लेकर मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चला रहा हूं। अपनी दुकान होने से किसी तरह की समस्या नहीं आ रही है।
इसी क्रम में इटौरा निवासी रामसमुझ यादव का कहना था कि काझा कोठा स्थित कौशल विकास केंद्र से ट्रेनिंग लेकर मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चला रहा हूं। अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की सोच रहा हूं। इसी क्रम में काझा निवासी प्रिंस कुमार का कहना था कि कौशल विकास केंद्र से प्रशिक्षण लेकर जन सेवा केंद्र का संचालन कर रहा हूं। दो लोगों को रोजगार भी दिया हूं। प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिलने से काफी हद तक समस्या से निजात मिली है। इसी क्रम में काझा निवासी देवेंद्र राजभर का कहना था कि प्रशिक्षण लेकर अब मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चला रहा हूं। घर गृहस्थी बेहतर तरीके से चल रही है।