उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्वावधान में शिक्षकों ने विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित 22 सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।
जिलाध्यक्ष कृष्णानंद राय ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की उदासीन रवैए से शिक्षकों की मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। शिक्षकों को पुरानी पेंशन से आच्छादित करने की मांग काफी समय से की जा रही है लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। शिक्षकों की मांगों का अविलंब निस्तारण नहीं किया गया तो 16 मार्च को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ कूच करने को विवश होंगे। शिक्षक नेता प्रवीण राय ने कहा कि शिक्षकों के गृह जनपद में अंतरजनपदीय स्थानांतरण किया जाए। मृतक शिक्षकों के आश्रितों को अध्यापक के पद पर नियुक्ति दी जाए। शिक्षकों के पाल्यों को पूर्व की भांति बीएड और बीटीसी में प्रवेश के लि 10 अंकों की वरीयता दी जाए। जिला मंत्री अखिलेश्वर शुक्ल ने कहा कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शैक्षिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए। प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के कुल पदों के 50 प्रतिशत पदों पर परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति की जाए। परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम में दूध का वितरण बंद किया जाए। परिषदीय विद्यालयों में सफाई कर्मचारी व चौकीदार की व्यवस्था की जाए। दो से अधिक संतान वाली शिक्षिकाओं को भी वरिष्ठतम दो संतानों की देखभाल के लिए बाल्य देखभाल अवकाश दिया जाए। धरने को नित्य प्रकाश यादव, सिद्धनाथ प्रसाद, मनिराम, धनंजय कुमार, राशिद जमाल, राधेश्याम, रामकेर यादव, रामरतन राम, गीता मौर्या, ममता शर्मा, मंजूलता पांडेय, रेनू श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया।