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सड़कों पर छुट्टा पशुओं का कब्जा, हो रहे हादसे

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नगर के बाईपास नेशनल हाईवे पर पर बैठा सांड़। - फोटो : mau
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जिले में सड़कों पर छुट्टा पशुओं के घूमने और आपस में लड़ने से लोग इनकी जद में आकर घायल हो रहे। पिछले दो सालों में अब तक छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 56 घायल हुए हैं। वहीं, बंदरों और कुत्तों के उत्पात ने भी लोगों को कम परेशान नहीं किया है। बंदरों के चक्कर में मकानों की छत से गिरकर अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।
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गाजीपुर तिराहा, आजमगढ़ मोड़, बाल निकेतन तिराहा आदि प्रमुख मार्गों पर झुंड में सांड़ और छुट्टा पशुओं की चहलकदमी लगातार जारी है। 

ख्वाजाजहांपुर, कृषि मंडी के पास कोपागंज, आजमगढ़ रोड पर बड़ागांव, मुहम्मदाबाद गोहना से गाजीपुर रोड पर, वलीदपुर में मुख्य सड़क पर झुंड के झुंड छुट्टा पशुओं को देखा जा सकता है। बेखौफ घूम रहे साड़ यातायात व्यवस्था में बाधक बन रहे। वहीं नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा कई सालों से आवारा पशुओं को पकड़ने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया जा रहा। साथ ही कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी योजना भी क्रियान्विय नहीं हो रही। भीटी क्षेत्र के निजामुदीपुरा निवासी प्रशांत मिश्रा, दीपक रावत, दिलीप शुक्ला, राजकुमार पांडेय आदि का कहना है कि समस्याओं को लेकर जिम्मेदारों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

उधर, बंदरों के आतंक से नगर के भीटी मुहल्ले में लोगों का अपने ही आंगन में कुछ देर तक गुजर पाना मुहाल हो गया है। चिरैयाकोट कोपागंज, दोहरीघाट, अमिला, इंदारा, वनेदवी, कहिनौर सहित कई गांवों में बंदरों का आतंक है। बंदरों के धकेल देने अथवा उनके डर से मकान के नीचे गिरकर तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जिला प्रशासन और दूसरे जिम्मेदार विभाग लोगों की इस मुसीबत से लापरवाह बने हैं। नगर और गांवों में बंदरों को पकड़ने के लिए नगरपालिका, नगर पंचायतें और न ही वन विभाग कोई कदम उठा रहा।
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