मऊ। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए शासन ने शहर में डीजल से चलने वाले आटों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस क्रम में अब नए आटो को शहरी क्षेत्र का ना तो परमीट जारी किया जाएगा और ना ही पुराने हो चुके आटो जिनकी अधिवर्षता आयु (समयावधि) पुरी हो चुकी होगी, उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। शासन से जारी इस नीतिगत आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए संभागीय परिवहन कार्यालय अब सक्रिय होगा।
मऊ जिले में कुल 7222 आटो पंजीकृत है। इसमें से 1098 आटो की आयु दस वर्ष पूरी हो चुकी है। इस तरह से जिले में सड़क पर चलने के लिए 6124 आटो अधिकृत है। इसमें से तीस फीसदी आटो यानि कि 1837 डीजल आटो शहर में संचालित होते है। हालांकि इन आटो को शहर के इर्दगिर्द मौजूद प्रमुख बाजारों से आठ किमी के रेडियस में सवारी ढ़ोने का परमीट जारी किया जाता है। लेकिन आटो चालक रतनपुरा, कोपागंज, सहित अन्य बाजारों से सवारियों को लादकर शहर आ जाते हैं।
दिन भर शहर में चलने के बाद शाम को सवारियों को लेकर अपने क्षेत्र को वापस लौटते है। लेकिन बढ़ते प्रदूषण को देख शासन ने आटो टैक्सी के संचालन के लिए नई गाइड लाइन जारी की, इसके तहत अब किसी नए आटो को शहरी क्षेत्र में वाहन को संचालित करने के लिए कोई परमीट नहीं जारी होगा। इसके अलावा जो आटो अभी संचालित है, उनको जारी परमिट का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। इस तरह से शहर में संचालित होने वाले डीजल आटो पूरी तरह से अब प्रतिबंधित होगे। साथ ही उनके स्थान पर ई रिक्शा को बढ़ावा दिया जाएगा। कुल मिलाकर शहरी क्षेत्र में अब ई रिक्शा संचालित होगे।
इस संबंध में बात करने पर एआरटीओ महेंद्र बाबू ने बताया कि फिलहाल शासन से जारी आदेश पर आरटीओ आजमगढ़ की तरफ से जारी चिट्टी के अनुसार नए आटो को परमिट नहीं दिया जाएगा और ना ही पुराने आटो जिनकी अधिवर्षता आयु पूरी हो चुकी है, उनका नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अलावा परमिट के अनुसार आटो का संचालन सुनिश्चत कराया जाएगा। शहरी क्षेत्र में ई रिक्शा को तरजीह दी जाएगी, फिलहाल पूरे जिले में कुल 1400 ई रिक्शा पंजीकृत है। इसमें से 70 फीसदी ई रिक्शा शहर में संचालित है।