रेलवे स्टेशन पर बनाई जा रही बीम आधारित वाशिंग पिट।
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करोड़ों की लागत से मार्च में बनी वाशिंग पिट को तोड़ कर अब बीम आधारित वाशिंग पिट बनाने का काम रेलवे स्टेशन परिसर में शुरू हो गया है। छह मार्च को रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने वाशिंग पिट का लोकार्पण किया था और दूसरे दिन ही इसके13 पिलर क्षतिग्रस्त हो गए थे। मामला उछला तो पिलरोें की जांच कराई गई। जिसमें निर्माण सामग्री मानक पर खरी नहीं मिली। रेल प्रशासन द्वारा वाशिंगपिट के सभी पिलरों को तोड़वा दिया गया। अब यह कार्य दुबारा शुरू हो गया है। वाशिंग पिट के सभी 13 पिलर अब बीम आधारित बनाए जाएंगे। ऐसे पिलर गाजीपुर में बने वाशिंगपिट के तर्ज पर होेेंगे।
बताते चले कि छह मार्च को रेलराज्य मंत्री मनोज सिन्हा द्वारा लोकार्पण के बाद तीन माह से बंद वाशिंगपिट का संचालन आगामी तीन माह बाद दुबारा मेटेनेंस के बाद ही शुरू हो सकेगा। लोकार्पण के दूसरे दिन 13 पिलरों में आए क्रेक ने सालों से बन रहे वाशिंगपिट कार्य की गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दी। अमर उजाला ने 8 मार्च को ‘वाशिंग पिट के पिलर हुए क्षतिग्रस्त’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद चेते रेलवे प्रशासन ने इस खामी को दुरस्त कराने की कवायद की। बल्कि 14 मार्च को एक पिलर को तोड़कर उसकी सामग्री सैंपलिंग के लिए भेजी गई थी। जांच में अमानक सामग्री के प्रयोग के चलते जांच में पिलर मजबूत नहीं निकले।
इसके बाद गोरखपुर से निर्माण शाखा के चीफ इंजीनियर के निरीक्षण के बाद 3 अप्रैल को वाशिंगलाइन को गाजीपुुर में बने बीम आधरित वाशिंगलाइन के तर्ज पर दुबारा निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। जहां वाशिंगलाइन में बने एक हजार से ज्यादा पिलरों को तोड़ने का कार्य किया गया था। अब डेढ़ माह से ज्यादा समय बीतने के बाद सोमवार को रेलवे द्वारा बीम आधारित पिलरों का निर्माण शुरू कर दिया गया है। रेलवे सूत्रों की माने तो इस कार्य में तीन माह से अधिक समय लगने की उम्मीद है।