भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा, चरित्र निर्माण और समाज कल्याण का आधार बनाने की जरूरत है। ये बातें रंजीत विश्वकर्मा ने कला और संस्कृति विषय पर स्थानीय एक केंद्रीय विद्यालय में आयोजित सेमिनार में कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत विविधता पूर्ण देश है। यहां प्राचीन काल से ही विस्तृत ज्ञान की परंपरा रही है। यहां नालंदा, विक्रमशिला, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय प्राचीनकाल से ही ज्ञान का प्रकाश फैला चुके हैं। विदेशों से भी यहां विद्यार्थी पढ़ने आते थे। भारत में धन की देवीलक्ष्मी की अपेक्षा ज्ञान कीदेवी सरस्वती की पूजा अधिक की जाती है, जो यहां ज्ञान के महत्व को दर्शाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति के संवर्धन पर जोर दिया गया है। बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने पर बल दिया गया है। इस दौरान विद्यालय के समस्त शिक्षक शामिल रहे।