अभियुक्त राजू उर्फ राजकुमार राजभर शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का कार्य करता था। अलग अलग लोगों से करीब 60 लाख रुपये लेकर शेयर मार्केट में लगा चुका था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान उसे सजा होने का डर था। साथ ही लोगों से लिए गए पैसे भी वापस न करने पड़ें, इसलिए उसने एक शातिर योजना बनाई।
30 मई 2025 को उसने गाजीपुर में खुद को मृत दर्शाया। इसके लिए उसने गाजीपुर के रजागंज श्मशान घाट पर चिता लगवाई और खुद लेटकर फोटो बनवाया। घाट पर काम करने वाले कर्मचारियों से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इसके बाद नगर पालिका मऊ से इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया।
इन सभी फर्जी कागजातों को न्यायालय में दाखिल कर वह पूरी तरह से फरार हो गया और खुद को मृत साबित करने में सफल रहा। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक अनिल द्विवेदी की तहरीर पर शनिवार की रात राजू और कुछ अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।