मऊ/घोसी। घोसी नगर का इतिहासिक दसवीं मोहर्रम ताजिया का जुलूस कोरोना संक्रमण के चलते नही निकल सका। लोगों ने बताया कि अब तक के इतिहास में पहली बार ताजिया, तजियाखाने से नही निकली। लोगों ने शासन के आदेश और कोरोना संक्रमण को देखते हुए ऐसा किया। इस दौरान मुसलिम समुदाय के लोग अपने-अपने घरों में ही या इमामबाड़ा या मौला अली, अब्बास के मजार के साथ शहजादी शकीना और जैनब की स्थान पर परिवार के साथ पहुंच कर मातम किया।
फाका रखने वालों ने भूजा, शर्बत आदि खाकर पारन किया। पूर्वांचल में प्रसिद्ध घोसी नगर का दसवीं मोहर्रम का 25ह्र से अधिक सजे ताजियो का जुलूस जो कि 9वी मोहर्रम से ही निकल कर दसवी को बड़ागांव बाजार में बने ताजिया चौक से मातम, सीना जनी और अंजुमनों के नौहाख्वानी के बीच निकला जाता है। यह जुलूस बड़ागांव बाजार, नीमतले, बड़ा फाटक आदि से होते हुए शाम को राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित शिया इमामबाड़ा पर जाकर धार्मिक रीतिरिवाज के साथ समाप्त होता था।
इस वर्ष कोविड19 के चलते और प्रशासन की निर्देशानुसार नही निकल सका। इस वर्ष शिया समुदाय के लोगो ने अपने घरों में ही पूजापाठ करने के साथ मातम,नौहाख्वानी कर करबलाके शहीदों की याद में मातम मनाया।मौलाना काजिम नासरी,मौलाना अहमद अब्बास,मोहम्मद अली नासरी,फिरोज हैदर,मो सरकार आदि ने बताया कि हम लोगो के होश के साथ बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार पहली बार पूर्वांचल में अपना एक स्थान रखने वाला 9वी व10वी मोहर्रम का जुलूस नहीं निकला। सभी ताजिये तजिये खाने में ही रहे। हम सभी ने प्रशासन के निर्देशानुसार मोहर्रम को मनाया। घरों में ही रह कर इबादत करने के साथ करबला के शहीदों की याद में मातम मनाया और देश को कोरोना मुक्ति के लिए दुआ की।