दोहरीघाट। मातेश्वरी परिवार द्वारा आयोजित अश्वमेध यज्ञ के सातवें दिन मातृ भक्तों को सद्गुरु ने बताया कि शिष्य बनने के लिए गुरु के पास तीन युवक जाते हैं। गुरु उनकी परीक्षा लेने के लिए सबको एक एक कबूतर देते हैं और कहते हैं कि जो सबसे पहले इसको काट कर ले आएगा वो उसको दीक्षा देंगे।
शर्त बस इतना है कि कोई देखे नहीं l इस प्रकार तीनों युवक कबूतर लेकर चल देते हैं। दो युवक किसी झाड़ी में जाकर काट कर लौट आए, जबकि तीसरा नहीं लौटा और उसे लौटने में रात हो गई। उसने कबूतर को बिना काटे लेकर गुरु के पास पहुंचा। गुरु के पूछने पर बताया कोई ऐसी जगह नहीं हैं जहां पर कोई भी न देखे। यदि कोई नहीं तो मां शक्ति और ईश्वर तो सब जगह हैं। इस प्रकार मुझे दीक्षा मिले या न मिले मैं इसे नहीं काट सकता। गुरु उस युवक से प्रसन्न होते हैं और दीक्षा देते हुए शिष्य बना लेते हैं। मातेश्वरी परिवार के संस्थापक सद्गुरु महराज ने कहा कि वह मां आदिशक्ति सब जगह मौजूद हैं। वह आपके हर कर्मों का हिसाब देखती हैं, कर्मों का फल तो मिलना ही होता हैं। इस प्रकार हम सभी को नित्य सत्य कर्म करना चाहिए।