सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू के तत्वावधान में वामपंथी संगठनों ने मंगलवार को आजमगढ़ तिराहा स्थित अली बिल्डिंग के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। इस दौरान केंद्र सरकार विरोधी नारे लगाए। वक्ताआें ने कहा कि श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन कतई स्वीकार नहीं है। सरकार ने जन विरोधी कदम वापस नहीं लिया तो पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा।
संगठन के मंत्री रमन पाण्डेय ने कहा कि श्रम कानूनों में जो संशोधन कारपोरेट घरानों के इशारों पर किया गया है। यह संसोधन मेहनतकश जनता का खिलाफ है।
इस संशोधन का मतलब श्रमिकों के विशाल हिस्से को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया जाना और सेवायोजकों को कानून के उल्लंघन की खूली छूट दिया जाना है। मोदी सरकार सबसे पहले राजस्थान की भाजपा सरकार को श्रम कानून को माडल बनाकर अन्य राज्यों में इस तरह के संसोधन करने का निर्देश दिया है।
इससे फैक्ट्री कानून अधिनियन, औद्योगिक विवाद कानून तथा ठेके श्रम कानून शामिल है। जबरदस्त तरीके से संसोधन कर मजदूरों के हासिल अधिकार और संरक्षण में भारी कटौती शामिल है। कहा कि यह नीतियां ऐसे समाज में लाई जा रही है जहां 93 फीसद श्रम शक्ति असंगठित क्षेत्र में है।
कहा कि इंसपेक्टर राज को खत्म करने के नाम पर सरकार मेहनतकशों पर लुटेरे मालिकों का जंगलराज को उन्मुक्त कर रही है। श्रम कानूनों में संसोधन की आड़ में भारत को सबसे सस्ते श्रम ठिकाने के तौर पर पेश किया जा रहा है।
इसे कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रतिरोध कार्यक्रम में दवा प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश मेडिकल सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव एसोसिएशन, किसान सभा, बुनकर दस्तकार मोर्चा, सुगर वर्कर यूनियन सीटू, निर्माण मजदूर आदि नेता शामिल रहे। वामपंथी नेताओं ने ट्रेड यूनियन आंदोलन तथा मजदूरों के संघर्ष की अपील की। इस अवसर पर मुख्य रूप से रमन पाण्डेय, पीयूष उपाध्याय, विजय सिंह, राकेश सिंह, आदित्य कुमार, विपिन, वीरेंद्र कुमार, लालजी चौहान आदि उपस्थित रहे।