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मऊ: रिंग बांध टूटने से मखना गांव डूबा, पिंडोहरी और बिलौवा की तरफ तेजी से बढ़ रहा पानी, प्रभावित इलाकों में स्कूल बंद

Sat, 09 Oct 2021 07:22 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मऊ

सार

मखना ग्राम पंचायत के प्रधान अजीत कुमार सिंह ने अवगत कराया कि तमसा नदी के पानी से गांव पूरी तरह डूब चुका है। लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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मखना गांव में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे एडीएम और एसडीएम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मऊ जिले के रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत मखना में शुक्रवार को रिंग बांध के टूट जाने से इलाके में पूरी तरह जल प्रलय आ गया है। स्थिति यह है कि हर तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। इससे कई गांवों में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। रिंग बांध टूटने से बाढ़ प्रभावित गांवो का शनिवार को दूसरे दिन भी एडीएम केहरि सिंह, एसडीएम सदर जयप्रकाश यादव प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे और स्थलीय निरीक्षण किया। 

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उन्होंने बाढ़ प्रभावितों से समस्याएं जानी। मखना ग्राम पंचायत के प्रधान अजीत कुमार सिंह ने अवगत कराया कि तमसा नदी के पानी से गांव पूरी तरह डूब चुका है। लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नदी का पानी पिंडोहरी और बिलौवा के तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वहीं गाजीपुर जनपद के गांव रसूलपुर एवं फरीदनपुर भी जल प्लावन की चपेट में आ गया है। हर तरफ पानी से हाहाकार मचा हुआ है। 

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खालिसपुर ग्राम पंचायत स्थित राधे बांध के ऊपर से पानी बह रहा है। अगर यह बांध भी टूट गया तो इटौरा और अरदौना गांव भी पूरी तरह इसकी चपेट में आ जाएंगे। उधर गाढ़ा ताल में बढ़े पानी के कारण दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें तरह बेहाल हैं। अब तो गाढ़ा ताल का पानी समीपवर्ती गांव में भी फैलने लगा है। दतौड़ा, मुबारकपुर, नगवा, बीबीपुर, सीधवल, बिलौवा, गाढ़ा, मुस्तफाबाद से सेहबरपुर मडईली, बसारिखपुर, खालिसपुर समेत काफी गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। 

तमसा नदी के तटवर्ती गांव पिपरसाथ, लसरा, कोनिया, रेता, बहरामपुर आदि गांव के लोगों की स्थिति भी बद से बदतर हो गई है। कई गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुके हैं। बाढ़ प्रभावित गांव के विद्यालयों में पानी भरने से विद्यालय भी बंद चल रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा लोगों को पशुओं के चारे की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। लोगों की मांग है कि क्षेत्र में हुई क्षति का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
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