करीब तीन माह बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार जुलाई 2021 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। आठ महीने जेल में रहने के बाद दोनों भाई-बहन ढाई महीने पहले जेल से बाहर आ गए थे। अब इन पर गैंगेस्टर का केस दर्ज है।
सोमवार को मऊ जनपद की पुलिस ने अस्पताल पर दबिश दी और डॉ. अलका राय के भाई शेषनाथ को हिरासत में ले लिया। जबकि डॉ. अलका को अस्पताल में नजरबंद कर बाराबंकी पुलिस का इंतजार किया जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर जिले की पुलिस कुछ भी बोलने से परहेज कर रही है।
डॉ. अलका राय
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब जेल में बंद होने के दौरान मुख्तार अंसारी न्यायालय जाने के लिए जिस निजी एंबुलेंस का इस्तेमाल करता था, वह डॉ. अलका राय के अस्पताल के नाम पर पंजीकृत थी। इसका रजिस्ट्रेशन ( यूपी 41 एटी 7171 ) फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बाराबंकी एआरटीओ कार्यालय में कराया गया था। 31 मार्च 2021 को मामला प्रकाश में आने के बाद बाराबंकी कोतवाली नगर पुलिस ने मऊ जनपद के श्याम संजीवनी अस्पताल की संचालिका डॉ. अलका राय और उनके भाई पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया था।