मऊ। अधिक मुनाफा के चक्कर में ई-रिक्शा, ऑटो और जीप चालक हर रोज ओवरलोड करके लोगों की जान से खिलवाड़ करते हैं। क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों की नजर इन पर पड़ती ही नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि इन वाहनों को अक्सर ओवरलोड स्थिति में देखा जा सकता है। एक अप्रैल से 29 अप्रैल तक के आंकड़ें देखें तो कुल 5097 वाहनों का चालान कटा लेकिन इसमें ओवरलोड वाहनों पर एक भी चालान नहीं काटा गया।
22 अप्रैल से सड़क सुरक्षा पखवाड़ा चल रहा है यह पांच मई तक चलेगी। यातायात पुलिस लोगों को हेलमेट और सीटबेल्ट पहनकर वाहन चलाने के तो जागरूक करती है। लेकिन ओवरलोड सवारी वाहनों पर इनकी नजर नहीं पड़ती। जिले में 4994 ई-रिक्शा और 7139 ऑटो पंजीकृत हैं। सबसे अधिक समस्या तो ग्रामीण सड़कों पर है। जहां आठ सीट वाली ऑटो में 12 से 15 लोगों को बैठाया जाता है। लोग गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के चक्कर में ऑटो या जीप के पीछे लटक जाते हैं। लेकिन चालक मुनाफे की लालच में उन्हें मना नहीं करते। यातायात पुलिस द्वारा एक से 29 अप्रैल तक किसी न किसी गलती पर 5097 वाहनों का चालान काटा गया है। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि इनमें से एक भी चालान ओवरलोड का नहीं है। यहां सवाल ये उठता है कि क्या ओवरलोड सवारी वाहनों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती है। जबकि लोकसभा चुनाव को लेकर जिले में आचार संहिता के बाद से सभी प्रमुख मार्गों और चौराहों पर यातायात पुलिस सुबह से देर रात तक चेकिंग अभियान चला रही है।
इनसेट-
बढुआगोदाम-पिपरीडीह मार्ग पर अधिक समस्या
पिपरीडीह। बढुआगोदाम-पिपरीडीह मार्ग पर ई-रिक्शा और वाहन चालक एक बार में 18 से 20 सवारी बैठाकर चलते हैं। कम सवारी वाहन चलने से लोग साइड से लटक कर सफर करते हैं। सड़क इतनी खराब है कि बिना भार के ही वाहनों के पलटने ही आशंका बनी रहती है। इसके बाद भी चालक यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर गाड़ी में बैठाते हैं। संवाद
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इनसेट-
01 से 29 अप्रैल तक चालान की कार्रवाई
कारण संख्या
1. बिना ड्राइविंग लाइसेंस - 534
2. फोन पर बात करते वाहन चलाने पर - 12
3. बिना हेलमेट - 2757
4. बाइक पर तीन सवारी बैठने पर - 408
5. नो पार्किंग - 858
6. गलत नंबर प्लेट - 115
7. बिना इंश्योरेंस - 245
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कोट-
सड़क पर चलने वाले ओवरलोड वाहनों का चालान किया जाता है। वाहन सीज करने की कार्रवाई की जाती है। 22 अप्रैल से चल रहे सड़क सुरक्षा पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इस समय ऐसे वाहनों पर विशेष निगाह रहती है, लोगों को यातायात नियमों के बारे में जागरूक करने के साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- शीतला प्रसाद पांडेय, सीओ ट्रैफिक, मऊ