जिले में तेज धूप और गर्मी का कहर जारी रहने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। लगातार छह दिनों से अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा।
नगर सहित ग्रामीण इलाकों में लोग गर्मी से परेशान हैं। दोपहर के समय प्रमुख मार्गों पर सन्नाटा छाया रहा। जरूरी कार्य से बाहर निकलने वाले लोग सिर ढककर जाते देखे गए।
शुक्रवार को सुबह से ही तेज धूप निकली। सुबह नौ बजे से ही सूरज की तपिश लोगों को झुलसाने लगी। दोपहर होते-होते आसमान से आग बरसने का एहसास होने लगा। आर्द्रता 14 प्रतिशत रही और 11 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।
दोपहर के समय लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जरूरी होने पर ही लोग पूरे बदन को ढककर निकल रहे हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं।
गन्ने का रस, लस्सी और बेल के शरबत की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, लू लगना, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और तेज बुखार के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि खाली पेट बाहर न निकलें और अधिक से अधिक पानी व तरल पदार्थों का सेवन करें।
मवेशियों के लिए बढ़ा पानी का संकट
गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है। तालाब सूखने के कगार पर हैं, जिससे मवेशियों के लिए पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। खेतों में काम करने वाले किसान भी इस तपिश से त्रस्त हैं और काम की गति धीमी पड़ गई है। तापमान बढ़ने से सब्जी की फसलों पर भी असर पड़ने लगा है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि तापमान और बढ़ने की संभावना है। किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है और सब्जी के खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए।