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रामायण से जीने का तरीका सीखते हैं : राम मनोहर दास

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मऊ। नगर की सिंधी काॅलोनी में श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के स्थापना दिवस पर आयोजित श्रीराम कथा महायज्ञ का समापन रविवार को हुआ। इस दौरान रामदरबार की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। कथा व्यास ने कहा कि रामायण से हम जीने का तरीका सीखते हैं।
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सात दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास श्रीराम मनोहर दास शास्त्री ने लंका दहन, राम-रावण युद्ध, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि रामायण से हम जीने का तरीका सीखते हैं। रामायण से हमें आदर्श, सेवा भाव, त्याग व बलिदान की सीख मिलती है। भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों, वनवासियों के कष्ट दूर करते हुए संगठित किया। इसलिए हर राम भक्त का दायित्व है कि पुनीत कार्य में सहयोग प्रदान करे। कथा वाचक राममनोहर दास शास्त्री ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का वर्णन किया। राम दरबार की आकर्षक झांकी प्रस्तुति पर जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
कथा व्यास ने कहा कि बुराई और असत्य ज्यादा समय तक नहीं चलता है। अधर्म पर धर्म की जीत होती है। कथा के समापन पर श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के प्रधान सेवक विवेकानंद पांडेय ने कथा में सहयोग करने वाले लोगों का सम्मान किया। इस दौरान देवेंद्र मोहन सिंह, शिवधर यादव, संतोष अग्रवाल, अभिषेक खंडेलवाल, पंकज वर्मा, बबलू सिंह आदि रहे।
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