सुरक्षा की दृष्टि से जेलों में सीसी टीवी कैमरा और जैमर लगाने का आदेश शासन से पांच वर्ष पूर्व हुआ था, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी जनपद कारागार में जैमर नहीं लग सका है। जबकि सीसीटीवी कैमरा लगा दिया गया है। गाजीपुर जेल की बैरकों में सीसीटीवी कैमरा लगाने को लेकर हुए हंगामें को देखते हुए जेल प्रशासन भी यहां बैरकों में कैमरा लगवाने की हिम्मत नहीं जुटा सका है।
जिला कारागार मऊ में 528 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन इस समय यहां 640 कैदी निरुद्ध हैं। 2013 में ही सरकार ने जिला जेल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का शासनादेश जारी किया था। यह कार्य कई चरणों में होना था। लेकिन यह कार्य होने में पूरे पांच साल लग गए। इधर गाजीपुर जेल में हुए बवाल के बाद नींद से जागे जेल प्रशासन ने सीसी टीवी कैमरे लगवाने में तेजी लाई। तब जाकर एक सप्ताह पहले जिला कारागार में 30 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन्हें दो दिन पहले ही चालू किया गया है। अब जेल के बाहर और अंदर परिसर की गतिविधियां इन कैमरों में कैद हो सकेंगी। कैमरे जेल की बाहरी दीवारों पर, मेन गेट और अंदर परिसर में लगाए गए हैं। लेकिन बैरकों के अंदर, किचेन आदि कई स्थानों पर इन्हें नहीं लगाया गया है।
उधर, पांच साल पहले जैमर लगाने के आदेश का अभी तक पालन नहीं किया गया है। जैमर नहीं लगने से कैदियों द्वारा मोबाइल का बेधड़क होकर इस्तेमाल किया जा रहा। जैमर लगाने के लिए डीआईजी जेल ने अभी तक निरीक्षण भी नहीं किया है। डीआईजी के निरीक्षण के बाद उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, इसके बाद ही संबंधित एजेंसी को जैमर लगाने के निर्देश दिए जाएंगे। इस कार्य में अभी एक साल से अधिक का समय लग सकता है।