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Mau News: पेट के कीड़े बच्चों की एकाग्रता कर रहे भंग, पढ़ाई में नहीं लग रहा मन

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जिला अस्पताल ​स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चे।संवाद
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बच्चों के पेट में मौजूद कीड़े न सिर्फ उनके स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रहे हैं, बल्कि उनकी एकाग्रता भंग कर उन्हें पढ़ाई में भी पीछे ढकेल रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इससे बच्चे कुपोषित तो हो ही रहे हैं, साथ ही इसका सीधा असर मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल की एनआरसी में चार बच्चे अभी भर्ती हैं। हर महीने 12 से 14 केस आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग संयुक्त रूप से कुपोषण रोकने पर काम कर रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर चिह्नित बच्चों को पौष्टिक आहार देते हैं, स्वास्थ्य विभाग छह जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराता है।
आवश्यकता पड़ने पर कुछ बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। पिछले माह करीब 12 कमजोर बच्चे चिह्नित किए गए हैं, इनमें से अभी 4 बेहद कमजोर को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया है।
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वर्ष 2025 में करीब 150 बच्चे पुनर्वास केंद्र में भर्ती किए गए थे। अधिकांश मामलों में कुपोषण की एक बड़ी वजह पेट के कीड़े सामने आए हैं।चिकित्सक के अनुसार जिला अस्पताल की एनआरसी में छह माह से लेकर पांच साल तक के बच्चों का उपचार किया जाता है।
भर्ती बच्चे को करीब 14 दिन तक भर्ती कर उपचार करना होता है। इसमें सात दिन तक बच्चे के अंदर के इंफेक्शन को दूर किया जाता है। अगले सात दिन तक पोषण से संबंधित आहार दिया जाता है।

साल में दो बार अभियान
साल में दो बार फरवरी और अगस्त में राष्ट्रीय कृमि मुक्त अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष फरवरी के लिए 12 लाख 54 हजार बच्चे चिह्नित किए गए हैं। दस फरवरी को 8 लाख बच्चों को दवा खिलाई गई।

स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली छह जीवन रक्षक दवाएं

एल्बेंडाजोल : यह पेट के कीड़ों को खत्म करती है।
एंटीबायोटिक : घातक संक्रमण से बच्चों का बचाव करती है।
एमोक्सिलिन : निमोनिया व श्वसन तंत्र के संक्रमण रोकने के लिए।
विटामिन-ए और डी : विटामिन-ए आंखों और डी हड्डियों के लिए।
जिंक : दस्त के दौरान शरीर से खत्म हुए पोषक तत्वों की भरपाई के लिए।
आयरन एंड फोलिक एसिड : खून की कमी को दूर करने तथा दिमागी विकास के लिए।

पेट के कीड़े बच्चों के शरीर से पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे बच्चा एनीमिया (खून की कमी) और कुपोषण का शिकार हो जाता है। जब शरीर में आवश्यक ऊर्जा और पोषण की कमी होती है, तो इसका सीधा असर मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर पड़ता है। ऐसे बच्चे अक्सर थकान महसूस करते हैं और उनका मन पढ़ाई या किसी भी कार्य में नहीं लग पाता। एनआरसी में ऐसे बच्चों को पहले डी वार्मिंग कराने के बाद ही उपचारित किया जाता है। -डॉ. राहुल यादव, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल एनआरसी

जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर ऐसे बच्चों को चिह्नित कर पौष्टिक आहार दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से इन बच्चाें की जांच करने के बाद आवश्यक होने पर उपचार दिया जाता है। अभी जनपद में हर सौ में एक बच्चा कुपोषित है। -अजीत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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