नई दिल्ली में हाल ही में होटल में आग लगने की घटना के बाद मऊ में भी व्यवसायिक भवनों की जांच की जा रही है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के. वर्मा के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार और शनिवार को जिले के 10 होटल और अस्पतालों में पहुंचकर अग्निशमन उपकरणों की जांच की।
जांच के दौरान चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। 10 में से केवल दो होटलों में ही अग्निशमन के सभी उपकरण पूरी तरह से सही हालत में मिले। बाकी नौ स्थानों पर गंभीर लापरवाही देखने को मिली।
कई जगहों पर पानी की पाइप जाम पाई गईं, कहीं पानी का प्रेशर पर्याप्त नहीं था, तो कुछ स्थानों पर उपकरण चालू ही नहीं हो सके। जिन स्थानों पर खामियां मिली हैं, वहां के संचालकों को नोटिस जारी कर दो दिन में सभी उपकरणों को दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है।
निर्धारित समय में सुधार न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन अस्पतालों में लोग अपनी जान बचाने के लिए इलाज कराने पहुंचते हैं, वहीं उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
इसी तरह होटलों में ठहरने वाले लोगों के लिए भी जोखिम की स्थिति बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से अब तक 200 स्कूल, हॉस्पिटल, शॉपिंग मॉल, मैरिज हॉल, होटल और औद्योगिक संस्थानों के पास फायर एनओसी है, जबकि इस तरह के व्यवसायिक भवनों की संख्या जिले में 500 से अधिक है।
शुक्रवार को सीएफओ ने शहर के राहुल हॉस्पिटल, अली बिल्डिंग, डायमंड होटल और राय पैलेस में जांच की। शनिवार को आरएस पैलेस, सत्यम हॉस्पिटल, माधम होटल और सेल्फी प्वाइंट के पास स्थित हॉस्पिटल में पहुंचकर उपकरणों की जांच की।
इनमें से केवल डायमंड होटल और आरएस पैलेस में सभी उपकरण ठीक हालत में मिले। अन्य जगहों पर कुछ न कुछ कमियां थीं, जिन्हें सुधारने के लिए कहा गया है।
शहर के सबसे व्यस्त रहने वाले बाजार अली बिल्डिंग में आग से बचाव के लिए कोई सुविधा नहीं है। टीम ने जागरूक करते हुए सभी दुकानदारों को अपनी दुकान में एक-एक फायर इस्टींग्यूशर रखने का निर्देश दिया, ताकि आग लगने पर सभी मिलकर उस पर काबू पा सकें।
सभी व्यवसायिक भवनों में सुरक्षा मानक जरूरी
सीएफओ के. वर्मा ने बताया कि अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन करना सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य है, खासकर अस्पतालों और होटलों के लिए, जहां लोगों की जान-माल की सुरक्षा सीधे तौर पर जुड़ी होती है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
हर साल दो बार लिखते हैं पत्र, नहीं मिलती अस्पतालों की सूची
अग्निशमन विभाग के पास जिले में पंजीकृत अस्पतालों की सूची और नाम नहीं हैं, जिससे वह वहां सुरक्षा मानकों की जांच कर सके। दिल्ली में हादसे के बाद फायर सर्विस की एडीजी के आदेश पर सीएफओ ने छह दिन पहले ही सीएमओ को पत्र लिखकर पंजीकृत अस्पतालों की सूची मांगी थी, लेकिन वह नहीं मिली। सूची के लिए हर साल दो बार पत्र लिखा जाता है।